राजनीति

देश के विश्वविद्यालयों में आखिर हो क्या रहा है ?

देशभर के विश्वविद्यालयों के जो वर्तमान हालात बनकर उभर रहे हैं वे बेहद चिंताजनक व दुर्भाग्यपूर्ण हैं। देशभर में आज छात्रों के भविष्य के साथ जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है और उनका देश के राजनैतिक दल अपना स्वार्थसिद्ध करने के लिए दुरूपयोग कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय […]

कविता

कविता : मजदूर

कल रात की बासी रोटी को , मैं आज मजे से खा रहा हूँ , कल एक घर बना के आया था , मैं आज फिर बनाने जा रहा हूँ एक लोटा पानी पीकर फिर मैं अपनी भूख मिटा रहा हूँ , गम जो भी मन में था मेरे, मैं आज उसको भुला रहा हूँ […]

कविता

तुमसे है

जब तू पास होती है, मानो सारी दुनिया साथ होती है तेरे चले जाने के डर से, मेरी ये आंखें सारी रात रोती हैं जब तू मेरी खातिर सारी दुनिया छोड़ने की बात करती है तब तुझमें ही मुझे मेरी दुनिया दिखती है तू जाने या न जाने पर तेरी हर इक याद की शुरुआत […]

गीत/नवगीत

गीत : अब न सहेंगे…

अब ना सहेंगे कोई हमला, अपने देश की माटी पर, सीमा लांघ के चढ़ जाएंगे, आतंकियों की छाती पर, छप्पन इंची सीना अपना, सबको अब दिखला देंगे, देश के गद्दारों को छठी के, दूध की याद दिला देंगे, सोए हुए शेरों को तुमने, पत्थर मार जगाया है, अपने ही हाथों से अपनी, मौत को आप […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कितनी गहरी झीलें हैं कुछ ग़म की तफ़सीलें हैं छेड़ न उसके ज़ख़्मों को रूह में गहरी कीलें हैं बच्चों की हंसती आँखें या रौशन कंदीलें हैं दो पल तू भी हंस के देख सुख की बहुत सबीलें हैं ग़म यूँ उथले कर जैसे दीवाली की खीलें हैं रात-रात भर जगने की पुख़्ता बहुत दलीलें […]

कविता

“मुकरियां”

मन मह छाए रहता नितप्रति बहुरि करूँगी उससे विनती कह सुन लूँगी उससे बाता है सखि साजन, नहि सखि दाता॥ रात सताए हाथ न आए इधर उधर जा गोता खाए रखूँ सम्हारी न धीरज धारे है सखि साजन, नहि सखि तारे॥ मैं उसको वह मुझको निरखे सुबह शाम देखत मन हरखे चन्द्रमुखी मुख नैनन काजल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

अविद्यायुक्त असत्य धार्मिक मान्यताओं का खण्डन और आर्यसमाज

ओ३म् महर्षि दयानन्द प्राचीन वैदिक कालीन ऋषियों की परम्परा वाले वेदों के मंत्रद्रष्टा ऋषि थे। वह सफल व सिद्ध योगी होने के साथ समस्त वैदिक व  इतर धर्माधर्म विषयक साहित्य के पारदर्शी विद्वान भी थे। उन्होंने मथुरा निवासी वैदिक व्याकरण के सूर्य प्रज्ञाचक्षु स्वामी विरजानन्द सरस्वती से आर्ष व्याकरण की अष्टाध्यायी-महाभाष्य पद्धति का अध्ययन किया […]

संस्मरण

मेरी कहानी 126

पिंकी की मैरेज रजिस्ट्रेशन के बाद सब कुछ नॉर्मल हो गया था। पिंकी रोज़ाना फिर से काम पे जाने लगी थी । गुरदुआरे में सिख मर्यादा के अनुसार शादी एक साल बाद करने का तय किया गया था लेकिन पिंकी की सास के संदेशे आने शुरू हो गए कि हम शादी कर दें लेकिन पिंकी […]

हास्य व्यंग्य

मुकरी

    सब दिन पीछे पीछे डोले कभि कुछ मांगे कभि कुछ बोले डांटूं तो रो जावे नाहक ए सखी साजन? ना सखी बालक।   तन से मेरे चुनर उङावे मेरे बालों को सहलावे इसका छूना लगता चोखा ए सखी साजन? ना सखी झौंका   इसके बिन अब चैन न पाऊं इसको खो दूं तो […]