Monthly Archives: June 2016


  • ~बोल ~

    ~बोल ~

    तुम्हारें श्री मुख से दो शब्द निकले कि मैंने कैद कर लिया अपने हृदय उपवन में !! अब हर रोज दिल से निकाल दिमाग तक लाऊँगी फिर कंठ तक फिर मुस्कराऊँगी चेहरे पर एक अलग सी...

  • ब्याहता एक ऐसी भी है

    ब्याहता एक ऐसी भी है

    उन्मन मन, अर्थहीन जीवन, असाध्य पीड़ा हृदयविदारक, विषयासक्त के प्रति समर्पित, अबला एक नारी है। मनस्ताप अवर्णीय, आत्मकथा अकथनीय, दिनचर्या सामान्य रखने वाली, अविकल्पित एक कहानी है। अनभिज्ञ नहीं ज्ञाता हूँ, मैँ बेबस और लाचार, मातृत्व...

  • कुण्डलिया छंद

    कुण्डलिया छंद

    मन मयूर चंचल हुआ, ढ़फली आई हाथ प्रेम प्रिया धुन रागिनी, नाचे गाए साथ नाचे गाए साथ, अलौकिक छवि सुंदरता पिया मिलन की साध, ललक पाई आतुरता कह गौतम कविराय, कलाकारी है कर धन मंशा दे...






  • ** ख़ता **

    ** ख़ता **

    बूँद यारा शराब हो जाये गर नज़र से जनाब हो जाये गर फरिश्तों का हो करम मुझ पर हर ख़ता भी सबाब हो जाये क्यों रहे डर हमें सवालों का मन जो हाज़िर जवाब हो जाये...