धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

संस्कार विधि में ऋषि दयानन्द के कुछ मन्तव्यों पर पं. युधिष्ठिर मीमांसक जी के विचार

ओ३म्   ऋषि दयानन्द सरस्वती ने आर्यसमाज की स्थापना 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई में की थी। 41 वर्ष पूर्व दिसम्बर, सन् 1975 में आर्यसमाज की स्थापना शताब्दी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक भव्य समारोह आयोजित कर मनाई गई थी जिसमें हमने भी अपने युवा मित्रों एवं स्थानीय समाज के लोगों के भाग […]

कविता पद्य साहित्य

~बोल ~

तुम्हारें श्री मुख से दो शब्द निकले कि मैंने कैद कर लिया अपने हृदय उपवन में !! अब हर रोज दिल से निकाल दिमाग तक लाऊँगी फिर कंठ तक फिर मुस्कराऊँगी चेहरे पर एक अलग सी चमक बिखर जाएँगी बार बार यही दुहराती रहूंगी क्योकि अच्छी यादों को बार-बार खाद-पानी चाहिए ही होता है!! और […]

कविता

ब्याहता एक ऐसी भी है

उन्मन मन, अर्थहीन जीवन, असाध्य पीड़ा हृदयविदारक, विषयासक्त के प्रति समर्पित, अबला एक नारी है। मनस्ताप अवर्णीय, आत्मकथा अकथनीय, दिनचर्या सामान्य रखने वाली, अविकल्पित एक कहानी है। अनभिज्ञ नहीं ज्ञाता हूँ, मैँ बेबस और लाचार, मातृत्व की बेड़ी पैरों में, आत्मघात कल्पना से परे है। असह्य व्यवहार प्राणप्रिय का लोचन अश्रुमय है व्यथा बंधक अनुगामी […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलिया छंद

मन मयूर चंचल हुआ, ढ़फली आई हाथ प्रेम प्रिया धुन रागिनी, नाचे गाए साथ नाचे गाए साथ, अलौकिक छवि सुंदरता पिया मिलन की साध, ललक पाई आतुरता कह गौतम कविराय, कलाकारी है कर धन मंशा दे चितराय, सुरत बसि जाए तन मन॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

ब्लॉग/परिचर्चा

मुस्कुराहट के केवल चिह्न का अनोखा जादू

खुद को समझाने के लिए मात्र एक ही पंक्ति में मुस्कुराहट की महिमा बतानी हो तो, यों कहा जा सकता है-   ”सारा जहां है तेरा, तू मुस्कुराना सीख ले.” सच में मुस्कुराहट जैसी कोई इनायत नहीं है, इसके जैसी कोई दवाई नहीं है.   ”एक पहचान हज़ारों दोस्त बना देती है, एक मुस्कान हज़ारों […]

कविता

कविता : आदमी का चमत्कार

आदमी के प्यार को, रोता रहा है आदमी। आदमी के भार को, ढोता रहा है आदमी।। आदमी का विश्व में, बाजार गन्दा हो रहा। आदमी का आदमी के साथ, धन्धा हो रहा।। आदमी ही आदमी का, भूलता इतिहास है। आदमी को आदमीयत का नही आभास है।। आदमी पिटवा रहा है, आदमी लुटवा रहा। आदमी को […]

बाल कविता

बालकविता : दो बच्चे होते हैं अच्छे

कहाँ चले ओ बन्दर मामा, मामी जी को साथ लिए। इतने सुन्दर वस्त्र आपको, किसने हैं उपहार किये।। हमको ये आभास हो रहा, शादी आज बनाओगे। मामी जी के साथ, कहीं उपवन में मौज मनाओगे।। दो बच्चे होते हैं अच्छे, रीत यही अपनाना तुम। महँगाई की मार बहुत है, मत परिवार बढ़ाना तुम। चना-चबेना खाकर, […]

संस्मरण

मेरी कहानी 143

आख़री रात मुम्बई में बिता कर जब सुबह तीन वजे अलार्म ने हमें उठने की चितावनी दी तो हम को उठना ही पड़ा। जितने भी दिन हम ने मुंबई में बिताए, बहुत मज़े के दिन थे और इस के बाद हमे मुंबई जाने का कभी वक्त नहीं मिला। दिसम्बर 2003 में जब हम गोआ की […]

गीत/नवगीत

गीत : मधु माधुरी ज़िन्दादिली !

मधु माधुरी ज़िन्दादिली, उद्यान प्रभु के है खिली; विहँसित प्रखर प्रमुदित कली, जल गगन अवनि से मिली ! बादल बदलते रूप निज, हर घड़ी रहते सृजन रत; उर्मि बिखेरे सूर्य नित, भव रूप दिखलाता अमित ! सुन्दर सुहागिन सी सजी, हर पहाड़ी लगती सुधी; बहती नदी कल कल सधी, चिर चेतना संवित बुधी ! मानव […]

गीतिका/ग़ज़ल

** ख़ता **

बूँद यारा शराब हो जाये गर नज़र से जनाब हो जाये गर फरिश्तों का हो करम मुझ पर हर ख़ता भी सबाब हो जाये क्यों रहे डर हमें सवालों का मन जो हाज़िर जवाब हो जाये लब नुमाइश अगरचे कर दें तो लफ़्ज़ हर बेनक़ाब हो जाये रात “मुस्कान”हो गई देखो इतना सो लो कि […]