पहेलियाँ – ३

(१)
पानी से ज्यों हाथ मिलाता
मस्त बुलबुले खूब बनाता
मक्खी का तो पूरा दुश्मन
बाकी भी सब गंद हटाता

उत्तर – साबुन

(२)
भरे पेट में इतना पानी
खत्म न होती कभी कहानी
सबके छतपर बैठा मिलता
बिन बोले मुँह से इक बानी

उत्तर – पानी की टंकी

(३)
छोटी बगिया का अहसास
अब तो ये घर-घर का खास
तितली, भँवरे करें पसंद
मग भर पानी की है प्यास

उत्तर – फूलों का गमला

(४)
दरवाजे का छोटा भाई
उस जैसे ही काम
हाँ थोड़ा अंतर होता है
बोलो उसका नाम

उत्तर – खिड़की

(५)
गोल-गोल चक्कर ये काटे
बेचारा दिन-रात
तब हम थोड़ा तेल पिलाते
ये भी कोई बात?

उत्तर – सीलिंग फैन

परिचय - कुमार गौरव अजीतेन्दु

शिक्षा - स्नातक, कार्यक्षेत्र - स्वतंत्र लेखन, साहित्य लिखने-पढने में रुचि, एक एकल हाइकु संकलन "मुक्त उड़ान", चार संयुक्त कविता संकलन "पावनी, त्रिसुगंधि, काव्यशाला व काव्यसुगंध" तथा एक संयुक्त लघुकथा संकलन "सृजन सागर" प्रकाशित, इसके अलावा नियमित रूप से विभिन्न प्रिंट और अंतरजाल पत्र-पत्रिकाओंपर रचनाओं का प्रकाशन