गीत/नवगीत

दिल है दीवाना तेरे प्यार में

दिल है दीवाना तेरे प्यार में

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दिल है दीवाना तेरे प्यार में

इंकार न कर तू अब प्यार में

दिल…

 

तेरे लिये मैंने जग छोड़ा

तूने क्यों मुझसे मुंह मोड़ा

रुठ न मुझसे तू अब प्यार में

दिल …

 

मैंने तुमको अपना जाना

अपना रब तुमको है माना

दिल न दुखा तू अब प्यार में

दिल….

 

चाहे दुनिया हमसे रुठे

चाहे सबसे नाता टूटे

न तू जला और अब प्यार में

दिल….

©अरुण निषाद

डॉ. अरुण कुमार निषाद

निवासी सुलतानपुर। शोध छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय ,लखनऊ। ७७ ,बीरबल साहनी शोध छात्रावास , लखनऊ विश्वविद्यालय ,लखनऊ। मो.9454067032