गीत/नवगीत

आई योग दिवस की वेला

 

आई योग दिवस की वेला, क्यों न लगाएं आसन मेला
क्यों न लगाएं आसन मेला, आया समय बड़ा अलबेला-आई योग दिवस——

 
1.रोग निवारण करने वाला योग ही हैSSS
जीवन सबल बनाने वाला योग ही हैSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

 
2.चक्रासन से पेट-पीठ को स्वस्थ करेंSSS
ताड़ासन से पैरों को मज़बूत करेंSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

 
3.पवनमुक्तासन गैस से मुक्ति दिलाता हैSSS
मयूरासन कफ़-मुक्ति सुमन खिलाता हैSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

 
4.हलासन से बवासीर और शुगर हटेंSSS
वक्रासन से मेरुदंड को स्वस्थ करेंSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस की—-

 
5.योग करोगे मौज हमेशा बनी रहेSSS
कितने सुंदर कितने स्वस्थ हो दुनिया कहेSSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

 
6.हर आसन की महिमा बहुत ही है न्यारीSS,
इनसे सजाएं तन-मन की हम फुलवारीSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

 
7.रोग निवारण करने वाले उपकारीSS
तन-मन सबल बनाते हैं ये हितकारीSS
आया समय बड़ा अलबेला, क्यों न लगाएं आसन मेला-आई योग दिवस—-

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

5 thoughts on “आई योग दिवस की वेला

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत अच्छा गीत, बहिन जी !

    • लीला तिवानी

      प्रिय गुरमैल भाई जी, यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ, कि आपको गीत बहुत अच्छा लगा.

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    लीला बहन , योग दिवस पर लिखा यह गीत अत्ति उतम है .योग का मुकाबला दुनीआं की कोई ऐक्सर्साइज़ नहीं कर सकती ,कम्ज्क्म मुझे तो बहुत फायदा हुआ है .

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    लीला बहन , योग दिवस पर लिखा यह गीत अत्ति उतम है .योग का मुकाबला दुनीआं की कोई ऐक्सर्साइज़ नहीं कर सकती ,कम्ज्क्म मुझे तो बहुत फायदा हुआ है .

    • लीला तिवानी

      प्रिय गुरमैल भाई जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है.
      ”योग करे निरोग, फिर काहे को विरोध,
      रहना हो अगर निरोग, रोज़ करें सब योग.”
      अति सुंदर व सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

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