उपन्यास अंश

अधूरी कहानी : अध्याय-11: यादें

डिटेक्टीव करन डिटेक्टीव समीर के पास गया उर बोला क्या बात है मिस्टर करन? क्या मैने आपको हर्ट किया है? अगर ऐसा है तो आई एम साॅरी बल्कि मुझे ये नहीं पता कि मेरी किस बात ने आपकी आंखों में आंशू ला दिये हैं क्या आप मुझे बताना चाहेंगे?
इस पर समीर आंखों से आंशू पोछते हुए बोला कुछ नहीं बस आंखों में कचरा चला गया था।
तो मिस्टर करन आप कहना चाहते हैं कि रेनुका का भूत या आत्मा जो भी आप अपने ।शब्दों में कहते हैं वह इन लोगों से अपनी मौत का बदला ले रहीं है।
अगर आप सच में यही कहना चाहते हैं तो मेरा मानना है कि भूत या आत्मा जैसी कोई चीज नहीं होती है और आपने यहां बुलाकर खाली मेरा टाइम बर्बाद किया है।क्योंकि ये साबित हो चुके है कि उस लड़की का केस एक्सीडेन्ट और वैसे भी ये केस दो साल पहले का है और मैं भूत जैसी कोई चीज पर विश्वास नहीं करता तथा न ही इस आधार पर हम ये फाइल बंद कर सकते है और हमारा काम मुजरिम को पकड़ना है न कि किसी भूत को।
डिटेक्टीव करन-मिस्टर समीर आप समझने की कोशिश कीजिए ये बात सही है और और कई लोग इसे मानते हैं कि वह रेनुका की आत्मा ही है जो उन चारों से बदला लेने का लिये आयी है और वही खूनी है क्योंकि वह किसी को भी नुकसान नही पहुँचा रही है और केवल उन चारों के पीछे ही पड़ी है बल्कि दो मर चुके है और तीसरे पर हाल ही में हमला हुआ है।
अगर कड़ी से कड़ी जोड़े तो या बात सच है कि वह रेनुका की आत्मा है और अगला नम्बर वीरू तेजा का है और फिर बब्बर सिंह का ।
समीर बोला मिस्टर करन अगर आपकी कहानी में जरा भी सच्चाई है तो मैं रेनुका का केस रिओपन कराऊंगा और उसे इंसाफ़ दिलाऊंगा।अब मैं चलता हूँ और मेरा असिस्टेन्ड सूरज आपको आपके घर छोड़ देगा अगर आप चाहे तो क्योंकि वह उसी तरफ जा रहा है और फिर समीर डिटेक्टीव करन से विदा लेकर वहां से चले गया।
समीर का असिस्टेन्ड सूरज डिटेक्टीव करन से बोला चलिये सर मैं आपको आपके घर तक छोड़ देता हूं डिटेक्टीव करन गाड़ी में बैठ गया और गाड़ी चलने लगी तब डिटेक्टीव करन बोला मिस्टर सूरज मैंने सुना है कि आप डिटेक्टीव समीर के क्लासमेट रह चुके है और अच्छे दोस्त भी तब सूरज बोला हाँ सर और दोस्त तो हम आज भी है कभी भी समीर मुझे अपना असिस्टेन्ड नहीं बल्कि दोस्त मानता है।
तब करन बोला कि जब मैं समीर को रेनुका का केस सुना रहा था तब समीर बड़े मायूस हो गये थे और बाद में उनके आंशू तक निकल आये थे मुझे ऐसा लग रहा था कि मिस्टर समीर मुझसे कुछ छुपा रहे हो तब सूरज बोला कि समीर कुछ ऐसी यादों से जुड़ा है जो उसे चोट पहुँचाती है उसका दिल दहला देती हैं और वह इन यादों को भुलाना चाहते पर पर नही भुला पाते तभी वह खालीपन से बचने के लिये ज्यादातर अपने काम में व्यस्त रहते हैं ।
तब डिटेक्टीव करन बोला मिस्टर सूरज आप क्या कहना चाहते है मैं कुछ समझा नहीं तब सूरज बोला आज से लगभग चार साल पहले जब समीर के पापा एक होनहार तथा जानमाने वकील थे तब….

परिचय - देव कुशवाह

पता-ज्ञानखेडा, टनकपुर- 262309 जिला-चंपावन, राज्य-उत्तराखंड संपर्क-9084824513 ईमेल आईडी-dndyl.kushwaha@gmail.com

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