कविता

ब्याहता एक ऐसी भी है

उन्मन मन, अर्थहीन जीवन,
असाध्य पीड़ा हृदयविदारक,
विषयासक्त के प्रति समर्पित,
अबला एक नारी है।

मनस्ताप अवर्णीय,
आत्मकथा अकथनीय,
दिनचर्या सामान्य रखने वाली,
अविकल्पित एक कहानी है।

अनभिज्ञ नहीं ज्ञाता हूँ,
मैँ बेबस और लाचार,
मातृत्व की बेड़ी पैरों में,
आत्मघात कल्पना से परे है।

असह्य व्यवहार प्राणप्रिय का
लोचन अश्रुमय है
व्यथा बंधक अनुगामी सी
ब्याहता एक ऐसी भी है
ब्याहता एक ऐसी भी है।

सुचि संदीप, तिनसुकिया
(काव्य संग्रह दर्पण में प्रकाशित)

परिचय - सुचि संदीप

जन्म दिन एवं स्थान- 26 नवम्बर 1969, सुजानगढ़ (राजस्थान) परिचय- मैं असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में रहती हूँ। तिनसुकिया नारायणी साहित्य अकादमी के सचिव पद पर कार्यरत हूँ। रूचि- हिंदी में कविता और गीत लिखना । प्रकाशित कविता संग्रह- 'दर्पण' मेरी चालीस कविताओं का पहला काव्य संग्रह है जो हिन्दुस्तान प्रकाशन, दिल्ली द्वारा 2016 में प्रकाशित हुआ है। ब्लॉग- narayanitsk.blogspot.in mobile no.- 9864959341

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