ब्लॉग/परिचर्चा

मुस्कुराहट के केवल चिह्न का अनोखा जादू

खुद को समझाने के लिए मात्र एक ही पंक्ति में मुस्कुराहट की महिमा बतानी हो तो, यों कहा जा सकता है-

 
”सारा जहां है तेरा, तू मुस्कुराना सीख ले.”
सच में मुस्कुराहट जैसी कोई इनायत नहीं है, इसके जैसी कोई दवाई नहीं है.

 
”एक पहचान हज़ारों दोस्त बना देती है,
एक मुस्कान हज़ारों दुःख भुला देती है”

 
हमें बचपन से ही यह सिखाया जाता था कि, कोई भी काम मुस्कुराकर करो तो, वह काम पूजा के समान हो जाता है और आपको थकावट भी महसूस नहीं होती. आपके सिर में दर्द हो रहा हो बस, एक बार मुस्कुरा दो, सिर दर्द गायब. पलंग पर सो जाने की सोचने के बजाए काम बदल लो, सिर दर्द गायब. अधिकतर लोग अगर, सो रहे हों और किसी का फोन आ जाए या कॉल बेल बज जाए तो, वे परेशानी महसूस करते हैं, उसके बाद सिर दर्द शुरु और नींद गायब. हां, अगर आपने सकारात्मक सोच के साथ सोच लिया कि, हमारी कितनी अच्छी किस्मत है कि, फोन की ट्रिन-ट्रिन या कॉल बेल की राधे-राधे जैसे सुरीले स्वर में कह रही हो, ”जागो सोने वालो जगाने वाले आ गए, ढेर सारे काम बनाने वाले आ गए.” तो, यही घंटी या तो आपको फिर से मीठी नींद सुला देगी या ढेर सारे छोटे-छोटे काम पूरे करवा देगी जो, किसी-न-किसी कारण टल रहे थे.

 

 
ख़ैर यह तो हुई मुस्कुराने की महिमा की बात, अब हम मुख्य मुद्दे पर आते हैं. हम बात कर रहे हैं ‘मुस्कुराहट के केवल चिह्न का अनोखा जादू’. आज कम्प्यूटर का अनोखा जादू सिर चढ़कर बोल रहा है. इसका कार्यक्षेत्र इतना विशाल और वैज्ञानिक है कि, पलक झपकते ही बहुत-से काम तुरंत सम्पन्न हो जाते हैं. इसके पास हर चीज़ का जवाब है और बखूबी है. एक छोटी-सी बात को ही लीजिए जो, मीता के साथ हुई. एक बार मीता ने कीर्त्तन में एक भजन गाया. भजन सबको बहुत अच्छा लगा और उसे एक और भजन गाने को कहा गया. वो भी सबको बहुत पसंद आया. एक महिला ने कहा कि, आप इन भजनों को मुझे मेल कर दीजिए, मैं प्रिंट निकालकर, फोटोस्टेट करवाकर सबको दे दूंगी. मीता रात को जब घर के काम से खाली हुई तो उसने भजन मेल कर दिए. दो-चार मिनट में ही, जवाब की मेल में धन्यवाद के साथ मुस्कुराहट के चिह्न को भी भेजा गया जो, इस बात का प्रतीक था कि, मुझे आपके इस त्वरित प्रयत्न से बहुत खुशी हुई है. उस रात न जाने क्या हुआ कि, मीता को नींद ही नहीं आ रही थी. उसने प्रार्थना भी की लेकिन, नींद को न आना था, नहीं आई. अचानक उसे मुस्कुराहट के उस चिह्न के साथ-साथ उस महिला का मुस्कुराता हुआ चेहरा और फिर उसकी प्यारी-प्यारी बातें भी याद आ गईं और मीता उन्हीं सब में खोई हुई उस रात अमन-चैन की नींद सो पाई थी. एक मुस्कुराहट के केवल चिह्न का ही इतना अनोखा जादू है तो, मुस्कुराहट और खिलखिलाहट का कितना लाभ होगा, इसका अंदाज़ा आप लगा सकते हैं.

 

 
आज ही की बात लीजिए. मेरी एक सहेली मुझे घर के नीचे ही टकरा गई. बड़ी जल्दी में थी. मेरे जल्दी का कारण पूछने पर बोली कि, उसके सिर में दर्द है. मैंने कहा, “सिर में दर्द क्यों हो रहा है?” वह बोली, “कुछ नहीं, घर जाकर सोऊंगी, ठीक हो जाऊंगी.” मैंने कहा, “सिर दर्द का इलाज क्या केवल सोना ही है?” उसने पूछा कि, फिर वह क्या करे. मैंने कहा, “मुस्कुराइए, हंसिए और जो काम कर रहे हों, उसको बदल लीजिए, सिर दर्द गायब हो जाएगा?” अक्सर उसे मेरी बात पर विश्वास होता है. वह दृढ़ता से बोली, “चलो अच्छा हुआ, आपसे मुलाकात हो गई. अभी घर जाकर चाय पीती हूं और फिर पेपर चेक करूंगी.” बाद में दुबारा मिल गई तो मुझे धन्यवाद देते हुए बोली कि, वाकई अच्छा नुस्खा था, सिर दर्द भी नहीं रहा और पेपर भी चेक हो गए.अंत में हमें इतना ही कहना है कि,

 

 

 

“जब आप मुस्कुरा रहे होते हैं
तो, खुदा की इबादत कर रहे होते हैं
और
जब आप किसी को मुस्कुराने की प्रेरणा दे रहे होते हैं
तो खुदा आपके लिए इबादत कर रहा होता है.”

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

5 thoughts on “मुस्कुराहट के केवल चिह्न का अनोखा जादू

  • Man Mohan Kumar Arya

    बहुत अच्छी एवं सराहनीय रचना। मुझे लगता है कि मुस्कराना समाधि के आनंद की सीडी की प्रथम पदान है। समाधि में योगी ईश्वर से जुड़ कर ईश्वर के आनंद से पूर्ण तृप्त हो जाता है फिर उसे किसी सांसारिक सुख की अपेक्षा नहीं रहती। उस परम सुख का नमूना ही मुस्कराने की आदत है। मुस्कराना भी एक प्रकार का योग है। जो भी चाहे वह इस योग का अभ्यास कर लाभ प्राप्त कर सकता है। बहुत अच्छी रचना के लिए हार्दिक धन्यवाद बहिन जी. सादर।

    • लीला तिवानी

      प्रिय मनमोहन भाई जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. मुस्कुराना समाधि के आनंद की सीढ़ी की प्रथम पादान है. सुख हो या दुःख, परमात्मा को हमारा मुस्कुराता चेहरा ही पसंद है, मुस्कुराने से ही योग-समाधि-साधना से जुड़ने का बल मिलता है. प्रतिक्रिया द्वारा प्रोत्साहित करने के लिए आपको भी बधाई.

      • Man Mohan Kumar Arya

        नमस्ते एवं हार्दिक धन्यवाद आदरणीय बहिन जी।

  • वाकई लीला बहन मुस्कराना सब से अछि दवा है, पांच मिनट ही हुए पिंकी का टेलीफून आया था, इस वक्त वोह चार लड़कियन ही ऑफिस में हैं ,उन का बौस सोमवार को काम पर आएगा ,इस लिए वोह ख़ुशी ख़ुशी सारा काम कर रही हैं .मैंने पिंकी को कहा, “घर वाला घर नहीं सानूं किसे दा डर नहीं “, वोह सारी लडकिया हंस पढ़ी .अभी अभी नेट पे आया और आप का लेख पड़ा तो मन और भी खुश हो गिया .हंसना और मुस्कराना एक ऐसा तोहफा है जिस को देने के लिए कोई मोल नहीं लगता और इस के नतीजे भी खूबसूरत निकलते हैं .

    • लीला तिवानी

      प्रिय गुरमैल भाई जी, हंसना-मुस्कुराना ही ज़िंदगी है. अति सुंदर व सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

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