Monthly Archives: June 2016


  •  “दोहा मुक्तक”

     “दोहा मुक्तक”

    प्रदत शीर्षक-  शहद – पुष्परस, मधु, आसव, रस, मकरन्द। शहद सरीखे लय मधुर, लाल रसीले होठ नैना पट लजवंत हैं, चंचल चाह प्रकोष्ठ लट लटकाये कामिनी, घूमत जस मकरंद पुष्परस मधु विहारिणी, संचय छ्त्ता गोठ॥  ...

  • ऐ मेरे हमसफ़र

    ऐ मेरे हमसफ़र

    क्या खूब क़त्ल तुम हर रोज कर रहे हो न शक की कोई गुंजाइश न सबूत छोड़ रहे हो ऐ मेरे हमसफ़र बस ख़ौफ़ के खंजर हर रोज घोंप रहे हो। भय के आवरण तले दबी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बिछड़ के तुझसे मुझे ये शहर अच्छा नहीं लगता कहां सजदा करूँ कोई भी दर अच्छा नहीं लगता मैं जिसके नाम से बदनाम दुनिया भर में हूँ यारो उसे ही आज-कल मेरा ज़िकर अच्छा नहीं लगता...


  • कविता : नयी सोच नया सवेरा

    कविता : नयी सोच नया सवेरा

    खुली पलक में ख्वाब बुनो, और खुली आँख से ही देखो। सपने चाँदनी रात में नहीं, तप्त तपन  की किरणों में बुनो। तपना पड़ता है सूरज की तरह, ख्वाब पूरे यूँ ही नहीं होते। निशा के...

  • कुछ रचनाएँ

    कुछ रचनाएँ

    जीवन-एलबम ********************** जीवन की आपाधापी में, खो जाते है पल ऐसे ही, दामन को छू जाती है बस, यादों के धुधलके से आती जो, तस्वीर निकलती कब एलबम से, “मौन” सोंचते हो जब तुम| इतराते बादल...

  • दोहा

    दोहा

      हरिहर अपने धाम में, रखें भूत बैताल गणपति बप्पा मोरया, सदा सर्व खुशहाल॥-1 बाबा शिव की छावनी, गणपति का ननिहाल धन्य धन्य दोनों पुरा, गौरा मालामाल॥-2 वाहन नंदी सत्य शिव, डमरू नाग त्रिशूल भस्म भंग...


  • एक और ध्रुव तारा

    एक और ध्रुव तारा

    बचपन में एक बालक ध्रुव की कहानी सुनी थी. ध्रुव राजा उत्थानपाद के पुत्र थे, लेकिन उनको अपने पिता की गोद में बैठने का सौभाग्य नहीं मिल पाया. राजा ध्रुव की विमाता के मोहपाश में बंधे...