इतिहास

देशभक्त शहीद ऊधम सिंह जी को उनके बलिदान दिवस पर नमन

ओ३म्   आज 31 जुलाई, 2016 को देश के गौरव को अक्षुण रखने वाले अमर बलिदानी वीर ऊधम सिंह जी का बलिदान दिवस वा श्रद्धा पर्व है। हम भारत माता के इस वीर व निर्भीक सपूत तथा  सांसारिक एषणाओं से मुक्त साहसी ऊधम सिंह जी को अपनी भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित करते हैं। आजकल श्रद्धाजंलि देने […]

कविता

कविता : मैंने लिखना छोड़ दिया

मैंने लिखना छोड़ दिया, भला लिखे या बुरा लिखे छुट पुट मुक्तक खूब लिखे, मुख पोथी पर बड़े जतन से भाव नदी में डूब लिखे , फिर भी कोई उन्हें न भाया, नन्हा सा दिल तोड़ दिया मैंने लिखना छोड़ दिया मैंने लिखना छोड़ दिया (1) मुक्तक में संगीत बसा, सुंदर छोटा गीत बसा छोटी […]

कविता

कविता

केसर की क्यारी से आई सोंधी बयार , महक उठा सखी मेरा सूना आगार है! अलसाई ऊषा ने खोल दिये मुंदे नयन, सूरज की किरणों ने किया श्रंगार है! विरहन के होठों पर सजे सखी प्रेम गीत , मन के उपवन में अब छाई बहार है! भीत पर जड़ी छवि मुस्काती मंद मंद, भेज दिया […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आघुनिक काल में सभी मतों का अन्धविश्वास-ग्रस्त होना और उन्हें दूर करने में उदासीन होना महान आश्चर्य

ओ३म्   मनुष्यों की समस्त जनसंख्या इस भूगोल के प्रायः सभी व अनेक भागों में बस्ती है। सारी जनसंख्या आस्तिक व नास्तिक दो मतों व विचारधाराओं में बटी हैं। बहुत से लोग ऐसे हैं जो ईश्वर व जीवात्मा के अस्तित्व को न तो जानते हैं और मानते हैं। वह खुल कर कहते हैं कि ईश्वर […]

कविता

मधुगीति : चला चलता हृदय हँसता !

चला चलता हृदय हँसता, प्रफुल्लित तरंगित होता; सृष्टि के सुर सुने जाता, इशारे समझता चलता ! धरा धाए मुझे चलती, सरस कर जल लिए चलता; अग्नि ऊर्जा दिए चलती, वायु प्राणों को फुर करती ! शब्द आकाश ले चलता, चित्त चेतन गति लेता; सगुण में अहम् ले चलता, महत नित निर्गुणी करता ! वनस्पति उत्स […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सूखे  हुऐ  ताल  से    बातें   पानी   की उनको  भी जिद  है शायद मनमानी  की अमन  चैन  की  बात वतन  में खुशहाली आई  हमको    याद    कहानी  नानी  की पल में  निकली  धूप  हुई पल में बरखा मुझे लगा फिर मौसम   ने नादानी   की लगी   नहीं  बारात  तलक  दरवाजे  […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म सामाजिक

सकारात्मक बदलाव की आधारशिला है शिक्षा

बदलाव के मायने :  सकारात्मक बदलाव यानी ऐसा बदलाव जो जीव, प्रकृति और पर्यावरण के वर्तमान एवं भविष्य के लिए सार्थक के साथ-साथ तीनों में सौहार्दपूर्ण सामंजस्य स्थापित करने में समर्थ हो। बदलाव तो अवश्यंभावी है। सिर्फ बदलाव हो जाना ही पर्याप्त नहीं है, अपितु बदलाव के साथ-साथ हमारी मानवता, नैतिकता और भौतिकता समग्र रूप […]

कविता पद्य साहित्य

गर अभी समझ न पाएंगे

सूरज खुद जलता जाता है, धरती को अधिक तपाता है, जब सूख गए सब नदी ताल, मानव, खग, पशु होते बेहाल, जल के भापों का कर संचन, नभ में बदल हो गए सघन काले बादल होते भारी, कर लिए पवन से जब यारी बूँदों के भार न सह पाये, वर्षा बन वसुधा पर आये. प्रकृति […]

अन्य लेख ब्लॉग/परिचर्चा लेख

महानगरों में जाम और मानसून!

दो बरस सूखे में गुजरे इस बरस में जान है, मेघ बरसेंगे समय से पूर्व से अनुमान है. प्रधान मंत्री श्री मोदी ने विदेश की सभाओं में संबोधित करते हुए कहा था कि प्रकृति भी उनका इम्तहान लेती है. दो वर्ष सूखाग्रस्त होने के बावजूद भी जी डी पी ग्रोथ ७.९ % है. इस बार […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर-जीवात्मा-प्रकृति विषयक अविद्या विश्व में अशान्ति का कारण

ओ३म्   संसार में लोग उचित व अनुचित कार्य करते हैं। अनुचित काम करने वालों को सामाजिक नियमों के अनुसार दण्ड दिया जाता है। न केवल सामान्य मनुष्य अपितु शिक्षित व उच्च पदस्थ राजकीय व अन्य मनुष्य भी अनेक बुरे कामों को करते हैं जिनसे देश व समाज कमजोर होता है और इसके परिणाम से […]