कविता

कविता : तकिया गीला

दिल में थे अरमां कईं
पर मूक रहे अल्फाज !
दिल ही दिल में रोते रहे
मेरे अनकहे जज्बात !!

झुकी नज़रों में थी हया
या छुपा था कोई इनकार !
तकिया गीला करते रहे
मेरे नैना सारी रात !!

देख संग किसी ओर के
दिल तड़पे है कितनी बार !
तुम तक फिर भी पहुचे नहीं
मेरे दिल की ये फरियाद !!

फिर से जुल्मी दे गया,
नयीं यादों की सौगात !
वो बदरा बरसें दो घड़ी
मेरे नैना सारी रात !!

अंजु गुप्ता