कविता पद्य साहित्य

बचपन की चाह

बारीकियों से
सीखता ही आ रहा हूं,
चाहता हूं मैं
जरा सी जिंदगी।
अनुभवों का
मैं लबादा ओढ़कर,
ना किसी को थोपना
हूं चाहता।
जाल सा
मैं चाहता हूं तोड़ना,
जो है घिरा
इस उम्र में,
है भले पचपन की
थापें पीठ पर,
एक बचपन चाहता हूं
सींचना।

परिचय - सूर्यनारायण प्रजापति

जन्म- २ अगस्त, १९९३ पता- तिलक नगर, नावां शहर, जिला- नागौर(राजस्थान) शिक्षा- बी.ए., बीएसटीसी., बी.एड. स्वर्गीय पिता की लेखन कला से प्रेरित होकर स्वयं की भी लेखन में रुचि जागृत हुई. कविताएं, लघुकथाएं व संकलन में रुचि बाल्यकाल से ही है. पुस्तक भी विचारणीय है,परंतु उचित मार्गदर्शन का अभाव है..! रामधारी सिंह 'दिनकर' की 'रश्मिरथी' नामक अमूल्य कृति से अति प्रभावित है..!

Leave a Reply