देशभक्त शहीद ऊधम सिंह जी को उनके बलिदान दिवस पर नमन

ओ३म्

 

आज 31 जुलाई, 2016 को देश के गौरव को अक्षुण रखने वाले अमर बलिदानी वीर ऊधम सिंह जी का बलिदान दिवस वा श्रद्धा पर्व है। हम भारत माता के इस वीर निर्भीक सपूत तथा  सांसारिक एषणाओं से मुक्त साहसी ऊधम सिंह जी को अपनी भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित करते हैं। आजकल श्रद्धाजंलि देने का तरीका यह बन गया है कि समारोह किये जाते हैं, नेताओं को बुलाया जाता है और शहीद के गुणों को स्मरण कर जोशीले भाषण होते हैं, उनके चित्र पर फूल आदि चढ़ाये जाते हैं। हम समझते हैं कि श्रद्धांजलि देने का यह तरीका अधूरा वैदिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। यदि श्रद्धाजलि दीये जाने वाले वीर पुरुष के समान हमारे विचार भावनायें नहीं बनती उनके कामों के अनुरूप जज्बा हमारा नहीं होता तो फिर उनका स्मरण-दिवस मनाना अधिक उपयोगी नहीं दीखता। जो लोग ऐसे पर्वों में भाग लेते हैं, उनका जीवन भी उन शहीदों के जीवन के अनुरुप ही होना चाहिये, ऐसा हमें लगता है। अतः हम सभी देशवासियों को इस अवसर पर विचार करना चाहिये कि कैसे हम अपने शहीदों के अनुरूप अपनी भावनाओं चरित्र को बनायें और उनके अनुरुप जीवन व्यतीत करें।

 

वीर व साहसी शहीद ऊधम सिंह जी का जन्म 26 दिसम्बर सन् 1899 को सुनाम जिला संगरूर पंजाब में श्री टहल सिंह पिता के यहां हुआ था। बैसाखी के दिन अमृतसर में जलियावाला बाग नरसंहार की घटना घटी जिसमें पंजाब के लेफ्टिनेण्ट गवर्नर माइकेल ओडायर ने जलियावाला बाग में शान्तिपूर्ण सभा कर रहे लोगों को घेर कर उन पर अंधाधंुध बन्दूक की गोलियों की बौछार की थी। इस घटना के परिणामस्वरूप सैकड़ो वृद्ध व युवा स्त्री, पुरुष व बच्चे मारे गये थे। देश के स्वाभिमान को चुनौती देने वाली इस घटना ने देशभक्तों को आक्रोशित किया था। इसी से प्रभावित होकर 20 वर्षीय वीर युवा ऊधम सिह जी ने इस घटना के लिए उत्तरदायी अंग्रेज अधिकारी को इसका दण्ड देने की प्रतिज्ञा ली थी जिसे उन्होंने इस घटना के 21 वर्ष बाद इंग्लैण्ड जाकर पूरा किया।

 

अपनी प्रतिज्ञा व संकल्प की पूर्ति का अवसर उनको इंग्लैण्ड में 13 मार्च, सन् 1940 को मिला था। वहां कैक्सटन हाल में एक बैठक होनी थी जिसमें माइकेल ओडायर को आना था। इसकी जानकारी मिलने पर ऊधम सिंह जी ने अपनी योजना को अन्तिम रूप दिया और वह एक पिस्तौल को अपने वस्त्रों में छुपा कर उस हाल में जा पहुंचे। मीटिंग आरम्भ हुई। माइकेल ओडायर मंच पर विराजमान थे। उन्होंने उनको अपनी पिस्तौल से दो गोलिया मारी जिससे उनका प्राणान्त हो गया। गोली चलाकर ऊधम सिंह जी भागे नहीं। उन्होंने वहां की पुलिस के सम्मुख आत्मसमर्पण कर दिया। उनकी प्रतिज्ञा पूरी हो चुकी थी जिसकी खुशी निःसन्देह उन्हें रही होगी। उनको ब्रिक्सन जेल में रखकर उन पर मुकदमें का नाटक किया गया। जेल में रहते हुए उन्होंने 42 दिन की भूख हड़ताल भी की थी जिसे बाद में बलपूर्वक समाप्त कराया गया। 31 जुलाई, सन् 1940 को उनको जेल में ही फांसी पर चढ़ा दिया गया। इस प्रकार भारत माता के एक वीर मातृभक्त पुत्र का जीवन अपने कर्तव्य के लिए बलिदान हो गया। ऐसे अनेक वीरों के त्याग और बलिदान से देश को आजादी मिली परन्तु हमें लगता है कि उसका लाभ कुछ ही लोगों को मिला व उन्होंने उठाया है। इसमें हमारा सिस्टम वा व्यवस्था भी अनेक छिद्रों के कारण असफल रही है। देश में एक प्रभावशाली तन्त्र हो जिसमें सबको न्याय मिले, अन्याय किसी के साथ न हो, इसके लिए प्रयास किये जाने की आवश्यकता है। सौभाग्य से इस समय एक योग्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को मिले हुए हैं। वह इसमें पूर्ण सफल हो सकेंगे, इसमें हमें आशंका है? यदि वह इस समस्या व स्थिति में थोड़ा-बहुत भी सुधार कर पीड़ितों और वंचितों को कुछ अधिक अधिकार दिला पायें तो यह उनके लिए बहुत उत्तम कार्य होगा।

 

कोर्ट में शहीद ऊधम सिंह जी द्वारा कहे गये शब्दों को प्रस्तुत कर हम इस लेख को विराम देते हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा था-‘मैंने माइकेल ओडायर को इसलिये गोली मारी क्योंकि उसने हमारे निदेार्ष व निहत्थे देशवासियों पर अकारण गोलियां चलवाकर उन्हें मरवाया था। इस कारण मैं उससे घृणा करता था। वह ऐसी ही मृत्यु का पात्र था। वह जलियांवाला बाग काण्ड का असली अपराधी था। उसने मेरे देशवासियों की भावनाओं को कुचला था, इसलिए मैंने उसे कुचल दिया। मैं विगत 21 वर्षों से उसके द्वारा किये गये अपमान का बदलना लेने के लिए अवसर की तलाश में था। मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने अपना कर्तव्य पूरा किया। मुझे मृत्यु का डर नहीं है। मैं अपने देश के लिए मृत्यु का वरण कर रहा हूं। मैंने ब्रिटिश शासन में अपने देश के लोगों को भूख से मरते हुए देखा है। मैंने इसके विरुद्ध अपना विरोध प्रकट किया है जो कि मेरा कर्तव्य था। मेरे लिए अपने देश के हितों के लिए मृत्यु का वरण करने से बढ़कर कोई अन्य पुरुस्कार नहीं हो सकता।’

 

हम वीर व स्वाभिमानी व बलिदानी देशभक्त शहीद ऊधम सिंह जी को आज उनके बलिदान दिवस पर अपनी श्रद्धांजलि देते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि देश का हर बच्चा व युवक उनके जैसे विचारा वाला देशभक्त हो। अन्त में अवसर के अनुरूप एक देशभक्ति के गीत की दो पंक्तियां भी प्रस्तुत हैं।

 

मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी।

जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी।

 

आज पूरा दिन ही इस गीत को गाने का दिन है। इति।

 

मनमोहन कुमार आर्य

परिचय - मनमोहन कुमार आर्य

नाम मन मोहन कुमार आर्य है. आयु ६३ वर्ष तथा देहरादून का निवासी हूँ। विगत ४५ वर्षों से वेद एवं वैदिक साहित्य सहित महर्षि दयानंद एवं आर्य समाज के साहित्य के स्वाध्याय में रूचि है। कुछ समय बाद लिखना आरम्भ किया था। यह क्रम चल रहा है। ईश्वर की मुझ पर अकथनीय कृपा है।