हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : देवी का अट्टहास

   देवी अत्यधिक क्रोध में हैं। अपने महल में चहल-कदमी करते हुए वो कुछ बुदबुदा रही हैं। ध्यान से सुनने पर ज्ञात होता है कि वो ‘तिलक, तराजू और तलवार/इनके मारो जूते चार‘ नामक अपने साम्राज्य के पवित्र मन्त्र का बेचैनी से जाप कर रही हैं। उनके हाथ में टंगे भारी-भरकम बटुए में पाँच पैसे, दस पैसे, बीस पैसे, चवन्नी व […]

कविता

गोरा हँसता है और काला…..

वो दौड़ता रहा और आर्डर आर्डर मज़े लूटता रहा ……   रंग भेद का भी अजीब खेल है गोरा हँसता है और काला बेमौत मरता है ……   जानवरों का भी   अपना खेला है   कोई बन्दूक से खेला किसी ने कलम पेला……   बेजुबान का कोई दर्द नहीं होता चार पाव से कोई […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋषि दयानन्द के प्रथम बंगला जीवनचरित का शेष भाग – ऋषि दयानन्द यदि अमेरिका में जन्में होते तो मृत्यु के एक सप्ताह पश्चात् उनकी जीवनी प्रकाशित हो जाती: नगेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय

ओ३म्   कल हमने श्री नगेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय जी लिखित ऋषि दयानन्द के बंगला जीवन चरित के हिन्दी अनुवाद का आरम्भिक भाग प्रस्तुत किया था। हमें अनेक पाठक मित्रों ने इस जीवनी का शेष भाग भी प्रस्तुत करने का अनुरोध किया। पाठक मित्रों के अनुरोध के अनुसार हम उक्त जीवनी का शेष भाग प्रस्तुत कर रहे […]

कहानी

विष

ग्लूकोज़ की बोतल से टिप-टिप कर बूंदे टपक रही थीं। कामाक्षी का पूरा ध्यान ख़ाली होती बोतल पर था। बोतल ख़ाली हो गई। मगर अब क्या करना है उसे पता नहीं। वह अपने आस-पास के बेड पर देखती है। कोई नहीं है। नर्स का कहीं अता-पता नहीं है। बोतल से लगी पाइप में ख़ून चढ़ने […]

उपन्यास अंश

अधूरी कहानी : अध्याय-44 : ब्लेक कैट

डिटेक्टीव समीर अपनी टीम के साथ वीरू तेजा के फ्लैट के पास पहुँच गये थे समीर ने अपनी गाड़ी रोकी और इधर-उधर कोई ऐसी जगह ढूंढने लगा जहां से वह वीरू तेजा के फ्लैट पर नजर रख सके उसे पास के ही करीब दो-ढाई सौ मीटर पर एक बिलिंडग दिखी वह उस बिलिंडग में चले […]

लघुकथा

राखी लघु कथा

राखी  “भाभी, अगर कल तक मेरी राखी की पोस्ट आप तक नहीं पँहुची तो परसों मैं आपके यहाँ आ रही हूँ  भैया से कह देना ” कह कर रीना ने फोन रख दिया| अगले दिन भाभी ने सुबह ११ बजे ही फोन करके कहा, “रीना राखी पहुँच गई है ” “पर भाभी मैंने तो इस […]

गीत/नवगीत

प्रदत चित्र पर एक कजरी गीत……….

पुतरी खेलन हम जइबें, हो मैया ताल तलैया……. वहि ताल तलैया मैया, सारी सखियाँ सहेलिया बेर के बिरवा सजइबें, हो मैया ताल तलैया……. गोबर से गोठब मैया, तोरी सुनरी महलिया नगवा के दूध चढ़इबें, हो मैया ताल तलैया…… कदमा की डाली मैया, डारब रेशमी डोरिया नेहिया के खूब झुलइबें, हो मैया ताल तलैया…… तीज त्योहारी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ब्रह्मसमाज के आचार्य श्री नगेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय का बंगला भाषा में लिखित ऋषि दयानन्द चरित का संक्षिप्त विवरण

ओ३म्   ऋषि दयानन्द के अनेक विद्वानों द्वारा रचित बृहत्त जीवन चरितों में प्रमुख जीवन चरित पं. लेखराम रचित है जो उर्दू में लिखा गया था। इसका हिन्दी अनुवाद हुआ जो सर्वाधिक लोकप्रिय है और वर्तमान में यही आर्यसमाज में प्रचलित है। उसके बाद पं. गोपाल राव हरि, पं. देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय, स्वामी सत्यानन्द, डा. भवानीलाल […]

गीत/नवगीत

गीत : याद तुम्हारी आती है

सावन के महिने में प्रिय याद तुम्हारी आती है तन पर पङती ये बूंदे फिर मन में अगन लगाती है नही रुकता मन का आवेश हरदम यूं घबराता है तङपन लिये ह्रदय में मेरे तेरा ख्याल सताता है कह नही सकती तुमसे दिलबर आँख छलक ही जाती है तन पर पङती ये बूंदे फिर मन […]

कविता

इंसानों में ही भगवान् होते हैं !!

फूलों से संसार सजता है संसार विचारों से महकता है विचारों से इंसान संवरते  हैं इसानों से परिवार रौशन होते हैं परिवार से रिश्ते बेहतर होते हैं रिश्तों से प्यार पनपता है प्यार में विश्वास होता है विश्वास से जहान रचता है जहान में इंसान बसते हैं इंसानों में ही भगवान् होते हैं इंसानों में […]