Monthly Archives: August 2016


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कितना चलूँ सम्हलकर किस्मत ये फिसल जाती है देखा कि देखते देखते तक़दीर बदल जाती है। जाने कैसी मजबूरी है अपने पर अपना ज़ोर नहीँ साँसों की लड़ी रफ्ता रफ्ता सीने से निकल जाती है। कितना...

  • दोहा मुक्तक

    दोहा मुक्तक

    प्रदत शीर्षक- अलंकार, आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर गहना भूषण विभूषण, रस रूप अलंकार बोली भाषा हो मृदुल, गहना हो व्यवहार जेवर बाहर झाँकता, चतुर चाहना भेष आभूषण अंदर धरे, घूर रहा आकार॥ — महातम मिश्रा,...

  • घिनौनी सोच -लघुकथा

    घिनौनी सोच -लघुकथा

    सत्यभामा `महिला क्लब’ चलाती थी और समाज की कमजोर स्त्रियों को आगे बढ़ाने का ढोंग करती थी । भ्रूण हत्या और घरेलू हिंसा पर बड़े -बड़े भाषण देती थी । अमीर लेकिन बुद्धिहीन स्त्रियों में उसकी...

  • चलो कहीं सैर हो जाये  -7

    चलो कहीं सैर हो जाये -7

    पुर्वकथा सार : हम कुछ मित्र मुंबई से माता वैष्णोदेवी के दर्शन कर भैरव घाटी की ओर बढे । अब आगे ………………. दुसरे दिन तय कार्यक्रम के मुताबिक पंडित श्रीधर के घर लोग जमा होने लगे...

  • गीतिका

    गीतिका

    यहीं कहीं आसपास खड़ी है जिधर देखिये प्यास खड़ी है खोकर कुछ एहसास खड़ी है कितनी गमगीन प्यास खड़ी है अपनों का तोड विश्वास खड़ी है कुछ गैरों संग प्यास खड़ी है दुखी है बहुत उदास...

  • मैय्या तेरे भवन निराले

    मैय्या तेरे भवन निराले

    मैय्या तेरे भवन निराले जयकारे-ही-जयकारे यहां आते हैं दिलवाले जयकारे-ही-जयकारे 1.कौल कंदौली जय-जयकारे माई देवा जय-जयकारे बाणगंगा के धारे जयकारे-ही-जयकारे 2.चरणपादुका जय-जयकारे आदिकुंवारी जय-जयकारे मिल जाएंगे किनारे जयकारे-ही-जयकारे 3.हाथी मत्था जय-जयकारे सांझी छत पर जय-जयकारे चम-चम...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    ( ढेल- मोरनी, टहूंको- मोर की बोली) नाचत घोर मयूर वन, चाह नचाए ढेल चाहक चातक है विवश, चंचल चित मन गेल चंचल चित मन गेल, पराई पीर न माने अंसुवन झरत स्नेह, ढेल रस पीना...

  • हाइकू”

    हाइकू”

    शिक्षा शिक्षा बेहतर है शिक्षा ले लो शिक्षा॥-1 शिक्षित घर खुशियों का आँगन हरें हैं बाग॥-2 नौ मन भार पढ़ाये बचपन झूकी कमर॥-3 खेलेने तो दो अपनी गलियों में नौनिहाल हैं॥-4 ये भविष्य हैं उछलता कूदता...

  • “मनहर घनाक्षरी”

    “मनहर घनाक्षरी”

    यह चार पदों(पंक्तियों मे) लिखा जाने वाला वार्णिक छंद है। 8/8/8/7 पर यति अर्थात प्रति पंक्ति 31 वर्ण, भाव प्रभाव रचना मे तुकांत लघु गुरु पर अनिवार्य। दाना मांझी को बताई, प्रशासन ने अधिक, लाचारी जो...