Monthly Archives: August 2016

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    है कितनी तार तार इंसानियत मैं क्या बताऊँ इंसानियत जो तोले वो तराज़ू कहाँ से लाऊँ लज्जा नहीँ आती सुनो अब रिश्ते भी बनाने में माँ बेटे की उमर के तुम्हें प्रेमी प्रेमिका दिखाऊँ सुनो हो...

  • “गीतिका”

    “गीतिका”

    शाम का पहर है चांदनी भी खिली होगी आ चलें समन्दर किनारों पे गलगली होगी वो लहर उफ़नकर चूमती जो दिदारों को जान तो लो किस हसर में वो तलहटी होगी।। मौजा उछल रहें होंगे चिघड़ती...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    लाला का यह जन्म दिन, रोहिणि खासम खास बुधवारी तिथि पावनी, गुरूवार उपवास गुरुवार उपवास, उदित यह महिमा भारी मथुरा भयो प्रकाश, पधारे हैं गिरधारी कह गौतम चितलाय, गोकुला में गोपाला यशुमति कोंख सुहाय, देवकी माँ...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    प्रदत शीर्षक-  दर्पण ,शीशा ,आईना,आरसी आदि शीशा टूट जाता है, जरा सी चोट खाने पर दरपन झट बता देता, उभरकर दाग आने पर आईने की नजर भी, देखती बिंदास सूरतें तहजीब से चलती है, खुदी मुकाम...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    लाली उगी सुबह लिए, पूरब सूरज तात नवतर किरणें खेलती, मन भाए प्रभात मन भाए प्रभात, निहारूँ सुन्दर बेला भ्रमर भंगिमा प्रात, पुष्प दिखलाए खेला कह गौतम चितलाय, सुहानी बरखा आली घटत बढ़त निशि जाय, पल्लवित...


  • मुक्तक :

    मुक्तक :

    हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को समर्पित जन-जन की आवाज सुनो क्यों उसी द्वंद को भूल गये लिखा रक्त से जिसे समय ने उसी छंद को भूल गए हां जिस ने इतिहास रचा था भारत का...


  • पिंजरे का तोता

    पिंजरे का तोता

    चोंच है मेरी लाल लाल और पंख हैं मेरे हरे आज बताता हूँ मैं तुमको जख्म हैं कितने गहरे । सुन्दरता ही मेरी दुश्मन निज किस्मत पर रोता हूँ चुप न रहूँगा आज कहूँगा मैं पिंजरे...