मुक्तक/दोहा

नेता लालू कह रहे…

अमीर दौलत जोड़ते ,गरीब ढोता लाश , विलसित नेता जी हुए, कौन करे प्रकाश || बाढ़ राहत योजनाये ,चढ़ी बहुत परवान , जनता भूखी मर रही,रोता मिला किसान || जलथल सारा एक हुआ ,एक दिखे आकाश, श्मशान तक गायब हैं, सडती मिलती लाश || बढ़ी बाढ़ को देखकर,जनता करे पुकार , नेता लालू कह रहे, […]

यात्रा वृत्तान्त

चलो कहीं सैर हो जाये -6

पुर्वकथा सार : हम कुछ मित्र मुंबई से ट्रेन द्वारा जम्मू और फिर बस द्वारा कटरा पहुंचे । बाणगंगा से अर्ध्क्वारी होते हुए हम लोग भवन पहुंचे और माताजी का दर्शन किये । अब आगे …………………………. माताजी का दर्शन कर उनकी नयनरम्य छवि को अपनी आँखों में बसाये हम लोग गुफा से बाहर आये । गुफा […]

भजन/भावगीत

मैय्या तूने लाखों की झोली भरी

मेरी भी झोली भरो अम्बे मैय्या तूने लाखों की झोली भरी इतनी-सी विनती सुनो अम्बे मैय्या तूने लाखों की झोली भरी-   1.तुम तो ममता का सागर हो मैय्या ममता की तुझको दुहाई हे मैय्या तूने लाखों की झोली भरी-   2.तुम तो करुणा का आंचल हो मैय्या आंचल की शोभा बढ़ादो हे मैय्या तूने […]

कविता

जीने दो

जीने दो यही है छोटा सा घर मेरा ये चार दीवारें मेरी सीमाएं मदमस्त दौड लगाती हूं पर दीवारों से टकराती हूं स्वाद नहीं यहाँ खाने में पानी भी फीका है ना दोस्त कोई ना हमसाया अकेलापन है मेरा साथी हवा भी नकली फिज़ा भी नकली मेरा ये संसार है नकली क्यों मेरी सुन्दरता पर […]

कविता

गौ माता

गाय को माता सब कहते पर कितना फर्ज़ निभाते आवारा पशु वो कहलाती क्या ये ही फर्ज निभाते ? जब तक गरज है हमे दुध की करते लालन पालन सब बंद हुआ जब दुध गाय का घर से बाहर करते सब कोई गौशाला छोड़ आया कोई फिरने दे आवारा कोई बेच आये कसाई को क्या […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इक तो अब हो गई पुरानी भी, हमको आती नहीं सुनानी भी तुम अपने गम से भी नहीं खाली, है अधूरी मेरी कहानी भी आशिकी मर्ज़ लाइलाज भी है, और पैगाम-ए-ज़िंदगानी भी थोड़ा तूने भरोसा तोड़ दिया, थोड़ी दिल को थी बदगुमानी भी कभी सैलाब तो कभी शोले, आँख में आग भी है पानी भी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म सामाजिक

आर्यसमाज का एक शताब्दी पूर्व दिल्ली में दलितोद्धार का अपूर्व कार्य

ओ३म्   महाभारत युद्ध के समाप्त होने के बाद देश निरन्तर पतन की ओर अग्रसर होता रहा जिस कारण नाना  प्रकार के धार्मिक एवं सामाजिक अन्धविश्वास एवं कुरीतियां प्रचलित हुईं। इन अन्धविश्वासों में मूर्तिपूजा, मृतक श्राद्ध, फलित ज्योतिष व जन्मना जाति व्यवस्था आदि मुख्य हैं। जन्मना जाति व्यवस्था में शूद्र वर्ण में मानी जाने वाली […]

गीत/नवगीत

गीत : न्यायपालिका सर्वोपरि है

न्यायपालिका सर्वोपरि है लेकिन यह संज्ञान रहे जन मानस से जुडी भावना का भी तो सम्मान रहे सारे मज़हब सम्प्रदाय भारत में सभी बराबर हैं लेकिन गज़ब फैसलों से जन मन का हुआ निरादर है प्रतिबन्धित जीवों के शिकार या हांडी दही महोत्सव के निर्णय हैं प्रश्न चिह्न वाले कैसे लगते श्रेयष्कर हैं हो रहे […]

संस्मरण

मेरी कहानी 160

सुबह उठे तो मज़े से हम चाय के साथ बिस्कुट ले कर बातें करने लगे और आज के प्लैन का सोचने लगे। अलगाव की टूरिस्ट गाइड बुक तो हमारे पास ही थी जो हम ने इंगलैंड में ही खरीद ली थी। हमारे दिमाग में तो बहुत कुछ देखने को था लेकिन यहां आ कर पता […]

गीतिका/ग़ज़ल

है ऐसा या वैसा या जैसा ‘नदीश’

भला है बुरा है, है अपनी जगह मेरा फ़ैसला है, है अपनी जगह ज़माना भले बेवफ़ा हो मगर अभी भी वफ़ा है, है अपनी जगह नहीं प्यार कुछ भी सिवा प्यार के तेरा सोचना है, है अपनी जगह नज़ारे हसीं लाख दुनिया के हों सनम की अदा है, है अपनी जगह मुलाकातें उनसे हुईं तो […]