Monthly Archives: August 2016

  • कविता

    कविता

    पिता पूछते क्या लाया है मां पूछे बस क्या खाया है दोनों में ही अपनापन है जिससे मानव बढ़ पाया है भूखे पेट न जाए सोया खाली पेट जमूरा रोया रहा आकलन सदा अधूरा क्या पाया...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    खुद-ब-खुद यह जिंदगी आसां डगर हो जाएगी मिलके चलने से यह मस्ती का सफर हो जाएगी जिन छतों पर मुद्दतों से ढेर सा मलबा पड़ा वह इमारत तय है एक दिन खंडहर हो जाएगी चरमराती कुर्सियों...

  • कहानी : हथियार

    कहानी : हथियार

    वह तेजी से भाग जा रहा था , क्षत-विक्षत वस्त्र ।जगह जगह शरीर पर बने ताजा घाव के निशान , पत्थरो और झाड़ियों के शूलों से घायल पाँव जिनमे से रिसता रक्त । पर इन सबकी...

  • कविता

    कविता

    मन ही मन मत रखो सभी कुछ खुलकर माइक पर भी बोलो अरे देश के ठेकेदारों जाकिर नाइक पर भी बोलो उगल रहा है जहर हमेशा अपनी गंदी तकरीरों से जाल भरम का फैलाता है अज्ञानी...