कविता : बेटी


इक बगिया में
खिले दो फूल !
“बेटा” वारिस
“बेटी” पराई कहलाए
आखिर क्यों ??

जन्म ले बेटा
खुशियाँ मने !
बेटी होने पर
मातम छा जाए
आखिर क्यों ??

बेटे को सुविधा
ऐशो – आराम !
बेटी को बेड़ी में
है जकड़ा जाए
आखिर क्यों ??

कुल को रौशन
दोनों कर सकते !
बेटी को कमतर
फिर भी आंका जाए
आखिर क्यों ??

अंजु गुप्ता

परिचय - अंजु गुप्ता

Am Self Employed Soft Skills Trainer with more than 20 years of rich experience in Education field. Writing is my passion. Qualification: B.Com, PGDMM, MBA, MA (English)