Monthly Archives: September 2016


  • नई चेतना   भाग-५

    नई चेतना भाग-५

    अगले दिन सुबह अमर की नींद बड़ी देर से खुली। धुप चढ़ आया था । दीवार पर लगी घडी सुबह के नौ बजा रही थी । अमर अनमने ढंग से उठा । उसके चेहरे पर कोई स्फूर्ति...


  • समय

    समय

    समय को आज तक कौन बांध पाया है? जिसने एकबारगी समय को समझ लिया, समय उसका साया है, सरमाया है.


  • मेरी कहानी 169

    मेरी कहानी 169

    बर्मिंघम से लुक्सर कोई छै घंटे का सफर था। यह वक्त खाने पीने और मैगज़ीन अखबार पढ़ने में ऐसे बीता कि पता ही नहीं चला, कब हम इजिप्ट लुक्सर एअरपोर्ट पर पहुँच गए लेकिन जब पहुंचे...