कविता

कविता : मेरा सब कुछ खाली करके

कमरे सारे भरे हुए हैं परन्तु मैं खाली हुई जा रही हूँ … तुम साथ लिए जा रहे हो मेरे -शब्द मेरे – गीत मेरी -हँसी मेरी -खुशी मेरी -नींदे मेरा – चैनों-करार एेसे में तुम्हीं बताओ क्या साबूत रह पायेगा मेरा आज मेरा कल क्या रह पाऊंगी मैं खुद के लिए भी थोडी़ सी […]

उपन्यास अंश

नई चेतना भाग-५

अगले दिन सुबह अमर की नींद बड़ी देर से खुली। धुप चढ़ आया था । दीवार पर लगी घडी सुबह के नौ बजा रही थी । अमर अनमने ढंग से उठा । उसके चेहरे पर कोई स्फूर्ति कोई ताजगी नजर नहीं आ रही थी। बड़े सुस्त कदमों से चलता हुआ अमर बाथरूम में घुस गया ।  […]

कविता

कविता : काश !

काश ! इस अधुरे रिश्ते को सम्पूर्ण कर जाते मेरी सांसों  में कुछ राहत की बूँदें भर जाते । इन आँखों में बैठी आस को जीवन दे जाते । तेरा जाना तय था जाने के लिए ही सही एक बार ! सिर्फ एक बार , लौट कर आ जाते … देहरी पर रूह को बैठे […]

इतिहास

शहीद भगत सिंह जी की 109 वीं जयन्ती पर उन्हें सश्रद्ध नमन

ओ३म्   आज शहीद भगत सिंह जी का जन्म दिवस है। आज ही के दिन 28 सितम्बर सन् 1907 में पंजाब के लायलपुर के बांगा गांव में पिता श्री किशन सिंह और माता विद्यावती जी के यहां आपका जन्म हुआ था। आपका पूरा परिवार ही क्रान्तिकारी था। दादा सरदार अर्जुन सिंह तथा पिता किशन सिंह […]

संस्मरण

मेरी कहानी 169

बर्मिंघम से लुक्सर कोई छै घंटे का सफर था। यह वक्त खाने पीने और मैगज़ीन अखबार पढ़ने में ऐसे बीता कि पता ही नहीं चला, कब हम इजिप्ट लुक्सर एअरपोर्ट पर पहुँच गए लेकिन जब पहुंचे तो शाम का वक्त था। एअरपोर्ट पर पहुँचते ही मन खुश हो गया क्योंकि हमारे सर पर पगड़ीआं देख […]

लेख

असंवेदनशीलता और भ्रष्टाचार का पर्याय बनते जा रहे अस्पताल

अभी कालाहांडी के आदिवासी दाना मांझी के पत्नी के मृत्यु के पश्चात पैसे के अभाव में एम्बुलेंस नहीं उपलब्ध करवाने और दाना मांझी द्वारा अपनी पत्नी के शव के तकरीबन 10 किलोमीटर अपने कंधे पर ले जाने जैसी असंवेदनशील घटना जिसमे आम नागरिक की असंवेदनशीलता तो सामने आई ही थी साथ सबसे गैर जिम्मेदाराना कृत्य […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुष्य सृष्टिकर्त्ता ईश्वर और अपने यथार्थ स्वरूप को जानने में उदासीन क्यों रहता है?

ओ३म्   मनुष्य के पास अपना एक भौतिक शरीर होता है। इस शरीर के साथ ही शरीर में अभौतिक जीवात्मा भी रहती है। जीवात्मा का गुण व स्वभाव ज्ञान व कर्म है। ज्ञान दो प्रकार का होता है स्वभाविक  व नैमित्तिक। स्वभाविक ज्ञान जीवात्मा का अपने निज अस्तित्व का ज्ञान है जिसे वह किसी दूसरे […]

सामाजिक

राष्ट्र की सच्ची शक्ति: प्रो. सन्तराम

ओ३म्   किसी राष्ट्र की सच्ची शक्ति उसकी विपुल वाहिनियों, विध्वंसकारिणी मशीनगनों, और बम्ब बरसाने वाले लड़ाकू हवाई जहाजों में उतनी नहीं, जितनी कि उसके भीतरी सामाजिक संगठन में रहती है। जो राष्ट्र भीतर से थोथा और फटा हुआ है, जिस की जनता एकता के सूत्र में बंधी हुई नहीं है, उस की रक्षा टैंक […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुष्य किसकी उपासना और ध्यान करे?

ओ३म्   हम मनुष्य है जिन्हें ईश्वर से बुद्धि प्राप्त हुई है। बुद्धि ज्ञान को धारण करती है। यदि बुद्धि में ज्ञान नहीं है तो वह अशुद्ध बुद्धि है और यदि उसमें सत्य ज्ञान है तो वह शुद्ध बुद्धि होती है। ज्ञान की प्राप्ति कर बुद्धि से ही सत्य व असत्य का निश्चय किया करते […]