Monthly Archives: September 2016


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सच कहती अफसाना हूँ खुद में एक जमाना  हूँ रोम-रोम पुलकित  होगा गा तू खुलकर गाना  हूँ जो मेरी सांसों में है उसके  लिए  बेगाना हूँ आज निगेहबानी में हूँ कल के लिए निशाना हूँ फिर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जुल्मों सितम से हम कभी घबरा नहीं सकते झुककर पनाह में तुम्हारी आ नहीं सकते ये और बात है कि तुम्हें पूजते हैं  हम लेकिन इशारों  पे हमें नचा नहीं  सकते दीपक हमारे हाथ के तुम...

  • बेटी

    बेटी

    जीवन की इस तिमिर निशा में बेटी तू शीतल चन्द्रिका सी झिलमिल करती जीवन में रत्न जटित ज्यों मुद्रिका सी।   उजली किरण सी मन में मेरे आई है बन नव विहान सी धरणी भी तेरी...

  • कविता : सुलगती क़लम

    कविता : सुलगती क़लम

    प्यार की दास्तां लिखूं तो महकती है कलम।। दर्द की कराहट लिखूं तो सिसकती है कलम।। सौन्दर्य की दिलकशी लिखूं तो कसमसाती है कलम ।। वीर, वीरांगनाओं, शहीदों की वीरता, शहादत लिखूं तो इतराती है कलम...

  • कस्तूरी !

    कस्तूरी !

    कस्तूरी ! कस्तूरी अनमोल है, दुर्लभ है। हर मृग की नाभी में नहीं होती। प्यार भी उतना ही अनमोल है, दुर्लभ है, हर किसी के भाग्य में नहीं होता। यह ईश्वर की अनुकंपा है, जब होती...

  • नसीब का खेल

    नसीब का खेल

    नसीब का खेल भी बड़ा ही अजीब है । कोई खुशनसीब है कोई बदनसीब है । नियति का खेल बड़ा ही निराला है । कोई बेहद अमीर है कोई बेहद गरीब है । सुस्वादिष्ट पकवान  मिलने...

  • *गरमागरम समोसे खाओ*

    *गरमागरम समोसे खाओ*

    आओ   बाबू,  लाला  आओ, गरमागरम  समोसे  खाओ। काजू, किसमिश, मेवे वाला, धनियाँ मटर  पुदीना डाला। आलू  इसमें  शिमले  वाला, डाला इसमें  गरम मसाला। मीठी  चटनी   डली  हुई  है, तीखी  मिर्ची  तली  हुई  है। मस्त  कचौड़ी ...

  • *आई हेट यू,पापा!*

    *आई हेट यू,पापा!*

      देवम के घर से कुछ दूरी पर ही स्थित है सन्त श्री शिवानन्द जी का आश्रम। दिव्य अलौकिक शक्ति का धाम। शान्त, सुन्दर और रमणीय स्थल। जहाँ ध्यान, योग और ज्ञान की गंगा अविरल वहती...

  • लहरों का चैम्पियन

    लहरों का चैम्पियन

    सर्दियों की गुनगुनी धूप की सुहानी वेला थी. रोज़ की तरह रमा आज भी अपने स्वीमिंग पूल के किनारे रखी बैंच पर बैठी चाय पी रही थी. सामने टेबिल पर बिस्कुट और नमकीन रखे थे. स्वीमिंग...