धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुस्मृति और आर्यसमाज का तीसरा नियम

ओ३म्   महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई में आर्यसमाज की स्थापना की थी। वेदों को संसार के सभी मनुष्यों का यथार्थ व सच्चा धर्म मानकर उनका प्रचार व प्रसार करने वाला आर्यसमाज विश्व का पहला सर्वतोमहान संगठन था व है। महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा आर्यसमाज के बनाये 10 नियम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सच कहती अफसाना हूँ खुद में एक जमाना  हूँ रोम-रोम पुलकित  होगा गा तू खुलकर गाना  हूँ जो मेरी सांसों में है उसके  लिए  बेगाना हूँ आज निगेहबानी में हूँ कल के लिए निशाना हूँ फिर राजा कहलाऊंगा अंधों  में  मैं  काना  हूँ — मंजुला उपाध्याय ‘मंजुल’

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जुल्मों सितम से हम कभी घबरा नहीं सकते झुककर पनाह में तुम्हारी आ नहीं सकते ये और बात है कि तुम्हें पूजते हैं  हम लेकिन इशारों  पे हमें नचा नहीं  सकते दीपक हमारे हाथ के तुम छीन लो बेशक एहसास के दीए को  तुम बुझा नहीं सकते जब चाहो आजमालो हमें देश के दुश्मन हम […]

कविता

बेटी

जीवन की इस तिमिर निशा में बेटी तू शीतल चन्द्रिका सी झिलमिल करती जीवन में रत्न जटित ज्यों मुद्रिका सी।   उजली किरण सी मन में मेरे आई है बन नव विहान सी धरणी भी तेरी पायल से सुरभित मेरे मन में वितान सी।   थके हुए राही को जैसे, सुख देती तरु की छाया […]

कविता

कविता : सुलगती क़लम

प्यार की दास्तां लिखूं तो महकती है कलम।। दर्द की कराहट लिखूं तो सिसकती है कलम।। सौन्दर्य की दिलकशी लिखूं तो कसमसाती है कलम ।। वीर, वीरांगनाओं, शहीदों की वीरता, शहादत लिखूं तो इतराती है कलम ।। वहशीपन, दरिंदगी, आंतकवाद की शर्मिंदगी लिखूं तो सुलगती है कलम ।। न करो टुकड़े दिलों को मज़हबी तलवारों […]

कविता

कस्तूरी !

कस्तूरी ! कस्तूरी अनमोल है, दुर्लभ है। हर मृग की नाभी में नहीं होती। प्यार भी उतना ही अनमोल है, दुर्लभ है, हर किसी के भाग्य में नहीं होता। यह ईश्वर की अनुकंपा है, जब होती है तो…… धरती पर उगती है कस्तूरी शैल पत्थर गुनगुनाते हैं, जिस्मों से रिस्ती है चांदनी वस्त्र मन के […]

कविता

नसीब का खेल

नसीब का खेल भी बड़ा ही अजीब है । कोई खुशनसीब है कोई बदनसीब है । नियति का खेल बड़ा ही निराला है । कोई बेहद अमीर है कोई बेहद गरीब है । सुस्वादिष्ट पकवान  मिलने पर भी कोई नखरे दिखाता है । कोई सूखी रोटी खाने को ललचाता है । किसी की जोली  खुशियों […]

बाल कविता

*गरमागरम समोसे खाओ*

आओ   बाबू,  लाला  आओ, गरमागरम  समोसे  खाओ। काजू, किसमिश, मेवे वाला, धनियाँ मटर  पुदीना डाला। आलू  इसमें  शिमले  वाला, डाला इसमें  गरम मसाला। मीठी  चटनी   डली  हुई  है, तीखी  मिर्ची  तली  हुई  है। मस्त  कचौड़ी  काँदे  वाली, खस्ता  और मसाले  वाली। देशी घी  की  आलू टिकिया, मन भाए तो खाना बिटिया।   छोले    और […]

कहानी

*आई हेट यू,पापा!*

  देवम के घर से कुछ दूरी पर ही स्थित है सन्त श्री शिवानन्द जी का आश्रम। दिव्य अलौकिक शक्ति का धाम। शान्त, सुन्दर और रमणीय स्थल। जहाँ ध्यान, योग और ज्ञान की गंगा अविरल वहती रहती है। दिन-रात यहाँ वेद-मंत्र और ऋचाओं का उद्घोष वातावरण को पावनता प्रदान करता रहता है और नदी का […]

लघुकथा

लहरों का चैम्पियन

सर्दियों की गुनगुनी धूप की सुहानी वेला थी. रोज़ की तरह रमा आज भी अपने स्वीमिंग पूल के किनारे रखी बैंच पर बैठी चाय पी रही थी. सामने टेबिल पर बिस्कुट और नमकीन रखे थे. स्वीमिंग पूल को देखते-देखते आज न जाने क्यों रमा को अपनी पक्की सहेली मिसेज़ तनेजा की याद आ गई. एक […]