उपन्यास अंश

नई चेतना भाग –२५

अमर बड़ी देर तक सिसकता रहा । काफी सोच विचार के बाद भी किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पा रहा था । बाबू भी ऊपर से तो सख्त दिखने का प्रयास कर रहा था , लेकिन अन्दर ही अन्दर उसकी आत्मा रो रही थी । वह अपने आपको अमर और धनिया की खुशियों पर डाका […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋषि दयानन्द का बलिदान सत्य की विजय व असत्य की पराजय

ओ३म् ऋषि दयानन्द ने दीपावली के दिन लगभग सायं 6:00 बजे अपनी नश्वर देह का अजमेर की भिनाय की कोठी में त्याग किया था। देहत्याग का मुख्य कारण उन्हें जोधपुर में रात्रि को दुग्ध में विष दिया जाना और उसके बाद उनके उपचार में असावधानी तथा चिकित्सक द्वारा जानबूझकर की गई साजिश प्रतीत होती है। […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मानवता का रक्षक व पोषक होने से गोवर्धन पर्व एक महान पर्व

ओ३म् आज गोवर्धन पर्व पर मनुष्य जीवन का पोषण अन्न, फल, जल व वायु सहित गोदुग्ध से होता है। इन खाद्य पदार्थों में सभी पदार्थ जड़ रूप में होते हैं। उनमें मनुष्यों व अन्य प्राणियों की तरह जीवन नहीं होता अतः इनको खाने व भक्षण करने से इन्हें कोई दुःख व पीड़ा नहीं होती। हमारे […]

ब्लॉग/परिचर्चा सामाजिक

यह दीवाली, देश के नाम

वैसे तो प्रधान मंत्री श्री मोदी ने अपनी हर दीवाली सेना के जवानों के साथ मनाने की परंपरा स्थापित की है. इस साल उनका विशेष आग्रह था कि इस बार सभी भारतीय एक दिया देश के जवानों के नाम जलाएं. इसका व्यापक असर हुआ और सभी भारतीयों के अन्दर सेना के सैनिकों के प्रति सम्मान […]

उपन्यास अंश

नई चेतना भाग –२४

बाबू सीढ़ियों से होकर पहली मंजिल पर स्थित सामान्य कक्ष में पहुंचा । यह सामान्य कक्ष अपेक्षाकृत बड़ा था । लगभग 80 बिस्तरों वाला यह कक्ष मरीजों से भरा हुआ था । अमर ने धनिया का बेड नंबर नहीं बताया था और जल्दबाजी में उसने पूछा भी नहीं था । अन्दर कक्ष में पहुँच कर […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

माटी का दीया

  छोटे-छोटे दीप जले कितने उत्साह से. टिम-टिम तारे जैसे उतरे हैं आकाश से. गली-मोहल्ले-चौबारे घर-ड्योढी-द्वारे. दूर तलक दीपावली अपने पैर पसारे. घर-घर दीप जलाएँ, मिलजुल कर उल्लास से। लौ जीवन का साक्ष्‍य तेल मर्यादा जीवन की. बाती रीढ़ दीप कल्पना माटी के तन की. माटी का दीया फैलाता प्रेम प्रकाश से. एक शहीद के […]

गीत/नवगीत

इक दिप जलाओ उनकी खातीर

आज दिवाली है हर घर में छलक रही खुशहाली है देश में कुछ घर ऐसे भी हैं जिनकी रातें काली हैं ।। बैठे हैं महफूज घरों में हम त्यौहार मनाते हैं याद करो कुछ उनकी जो खुद न्योछावर हो जाते हैं ।। देश में है दिवाली वो सीमा पर खेल रहे हैं होली नकली बम […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

दीपावली

“अप्प दीपो भवः” तथागत का ये संदेश सदियों बाद भी उतना ही सामायिक है जितना उनके समय में था। प्रत्येक वर्ष प्रकाशोत्सव दीपावली के आते ही ये संदेश स्वयमेव ही स्मरण हो उठता है। दीपावली जैसा कि हम सबको ज्ञात है दीपों का पर्व है। नाम ही है दीप + अवलि अर्थात दीपकों की पंक्ति। […]

गीत/नवगीत

आओ दीपावली मनाएँ

आओ दीपावली मनाएँ इस नीरव बीहड़ से वन को करें आलोकित अंतर्मन को सत्य, ज्ञान के दीप जलाएँ आओ दीपावली मनाएँ जगत के घने अंधकार में जीवन के शत-शत विचार में निस्वार्थ प्रेम चहुँ ओर फैलाएँ आओ दीपावली मनाएँ उर से करें सभी का आदर हाथ बढ़ाएँ शीश निवाकर क्रोध, लोभ को दूर भगाएँ आओ […]

गीत/नवगीत

गीत : इक दीप जले उनकी खातिर

(भारत के अमर जवानों को, उनके परिवारों को समर्पित है इस दीवाली का हर दीप और मेरी कविता का हर शब्द) दहलीज अभी दहली होगी, आँगन स्तब्ध खड़ा होगा घर के कोने कलुषित होंगे, चूल्हे पे दर्द चढ़ा होगा तस्वीर लिए माँ हाथों में, कुछ बातें बोल रही होगी पत्नी यूं ही हर आहट पर, […]