कविता पद्य साहित्य

“प्रेम-पथिक”

तुम कहाँ खो गई हो।
तुम क्या कर रही हो।
मुझसे नजरें तो मिला लें,
बहुत याद आ रही हो॥१॥

कहाँ हैं नहीं है पता।
हुआ क्या मुझसे खता।
कुछ तो बता दो मूझे,
भूल मेरा मुझे तो बता॥२॥

एक बार नजर तो मिला।
मुझसे क्या शिकवा गीला।
तमन्ना है मुझे जानने की,
मुस्कुराते हुए मुझे दिखा॥३॥

जानी सी नजरें हो गई पराई।
पहले कई बार उसने मुस्कुराई,
खिला हुआ चेहरा नहीं दिख रहा।
चेहरे पर आज क्यों रुसवाई ॥४॥

सामने मिली तो इजहार किया।
दूर चली गई तो इन्तजार किया।
आज मैं प्रेम-पथिक बन गया हूँ,
इस भरी महफिल में प्यार किया॥५॥
_______________रमेश कुमार सिंह
__________________15-05-2016

परिचय - रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

रमेश कुमार सिंह (हिंदी शिक्षक ) विद्यालय --उच्च माध्यमिक विद्यालय ,रामगढ़ ,चेनारी रोहतास जन्म तारीख --०५/०२/१९८५ शिक्षा --एम.ए. (हिन्दी,अर्थशास्त्र),बी.एड. हिंदी पता--कान्हपुर ,पोस्ट-कर्मनाशा ,जिला --कैमूर (बिहार)८२११०५ मोब.९५७२२८९४१०/९४७३००००८०/९९५५९९९०९८ Email - rameshpunam76@gmail.com प्राप्त सम्मान - भारत के विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से अब तक 52 सम्मान प्राप्त।

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