Monthly Archives: November 2016

  • गद्दारों की टोली में

    गद्दारों की टोली में

    देखो हाहाकार मचा है गद्दारों की टोली में है प्रयास में फिर भी सत्ता आ न सकेगी झोली में कुर्सी की चाहत में इतने नीचे गिरे यकीन नहीं शायद इनका नाम लिखा है आतंकी की गोली...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सफ़र घर वापसी का है, मजे का है खुशी का है संभल कर नाव से उतरें. किनारा ये नदी का है मुसाफिर हूं हमारा साथ, घड़ी बस दो घड़ी का है, हमारा दिल हमारा कब, हमारा...


  • दिल है पहलु में

    दिल है पहलु में

    दिल है पहलु में मगर इक कमी सी रहती है उसकी आवाज़ में बड़ी ख़ामोशी सी रहती है जिनकी पलकों पे कभी शाम नहीं होती थी हमारी शब अक्सर वहीँ तमाम होती थी जिनकी ज़ुल्फ़ों में...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जब की  खुद  हमने  बढाई है  मुसीबत अपनी, आओ खुद से ही  करी जाए  शिकायत अपनी। वक्त बदला भी  तो किस काम का  अपने यारों, बद से  बदतर  ही  हुई  जाए  है  हालत अपनी। लाख  फिर...

  • सरहद आल्हा /वीर छंद (गीत )

    सरहद आल्हा /वीर छंद (गीत )

      भड़की ज्वाला खूँ की प्यासी, सरहद भरती है हुंकार| उबल पड़ा फिर लहू हिन्द का ,सुनकर  साँपों की फुफकार|| दुर्गा मात जहाँ की बेटी ,बब्बर शेर जहाँ के लाल| भारत माँ का एक इंच भी...


  • नया ज़माना

    नया ज़माना

    संदीप स्वयं को आधुनिक मानता था. उसका कहना था कि जैसा ज़माना हो उसके अनुसार ही चलना चाहिए. ज़माने के साथ रफ्तार मिलाने में वह अक्सर यह भी नही सोंचता था कि इसका परिणाम क्या होगा....

  • गज़ल

    गज़ल

    कोई भी राह जीवन की मेरे तुम तक नहीं जाती, ना जाने क्यों मगर दीदार की हसरत नहीं जाती, हैं मजबूर हम दोनों ही अपने दिल के हाथों से, मेरी उल्फत नहीं जाती तेरी नफरत नहीं...

  • कविता

    कविता

    धरती अपनी धूरी पर चक्कर लगाती है किसी को कोई एतराज नही होता धरती सूरज के इर्द गिर्द चक्कर लगाती है किसी को खबर तक नही होती परन्तु…. जब मेरे पेट की भूख नाभी की परिक्रमा...