ग़ज़ल : इक घाट पे धुले वो सभी पैरहन तमाम

पर्दा जो उठ गया तो हुआ काला धन तमाम
चोरों की ख्वाहिशों के जले तन बदन तमाम

बरसों से जो महकते रहे भ्रष्ट इत्र से
इक घाट पे धुले वो सभी पैरहन तमाम

बावक्त असलियत का मुखौटा उतर गया
किरदार का वजूद हुआ दफ़अतन तमाम

ये बंद खिड़कियाँ जो खुली पस्त हो गई
सब झूठ और फरेब की बदबू घुटन तमाम

जादू न जाने क्या था मदारी के खेल में
मदहोश हो गई वो तभी अंजुमन तमाम

परवाज पर लगाम जो माली ने डाल दी
भँवरे का हो गया वो तभी बाँकपन तमाम

तदबीर में दवाएँ भी नाकाम हो रही
ईमान की खुराक से सुधरे वतन तमाम

— राजेश कुमारी ‘राज’

परिचय - राजेश कुमारी

राजेश कुमारी जन्मतिथि १० जून १९५६ जन्म स्थान मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश शिक्षा --------स्नातक (अंग्रेजी साहित्य ,संस्कृत ,राजनीति शास्त्र) स्नाकोत्तर (संस्कृत ) मेरठ विश्वविद्यालय से हुई है | कार्य अनुभव ----कुछ वर्ष -शिक्षण अनुभव(नेवल पब्लिक स्कूल विशाखापत्तनम ) वर्तमान में... ओपन बुक ओन लाइन साहित्यिक वेब साईट की कार्यकारिणी एवं सः संयोजक -कवितायेँ ,लेख ,कहानियां लिखना ,किताबें पढना , संगीत सुनना ,पेंटिंग ,चित्रकारी ,छायाचित्रकारी,ड्राइविंग आदि राजेश कुमारी के शौंक हैं ---बेडमिन्टन ,टेबिल टेनिस ,तैराकी आदि पसंदीदा खेल खाली वक़्त में खेलना पसंद करती हैं| सम्प्रति ----- प्रथम प्रकाशित पुस्तक ----(कविता संग्रह )ह्रदय के उद्दगार है दूसरी पुस्तक ---काव्य कलश तीसरी पुस्तक –ग़ज़ल संग्रह –साहिल पर सीपियाँ कुछ साझा काव्य संग्रहों जैसे ह्रदय तारों का स्पंदन , खामोश ख़ामोशी और हम , कवितालोक ,गीतिका लोक प्रेमाभिव्यक्ति , जीवन बुनते हुए , स्वर्ण आभा (राजस्थान )में इनकी कुछ कवितायेँ प्रकाशित हुई| यांत्रिकी देहरादून ,क्वावा शी सेज देहली ,हमारा घर,में तथा विभिन्न पत्रिकाओं में कवितायेँ प्रकाशित -- सम्मान –लखनऊ तस्लीम परिकल्पना सम्मान, ओपन बुक ऑनलाइन साहित्य रत्न हल्द्वानी सम्मान,कवितालोक रत्न हिसार सम्मान,जश्ने ग़ज़ल इलाहबाद सम्मान,साहित्य रत्न भोपाल सम्मान| राजेश कुमारी E1/1 CQA(I) ESTATE LADPUR DEHRADUN ,248008 E MAIL---rajeshvirendra@gmail.com