मुक्तक/दोहा

दो मुक्तक

सजल नयन आज जलधार
उर प्रिय तुमको रहा पुकार
रात कांटों की सेज समान
खोजता तुमको मेरा प्यार

विरह की सुलग रही है दीप्ति
मिलें कभी मन अपना हो तृप्त
मिलन की चाह अभी तक शेष
तुम्हारे बिन जीवन मेरा रिक्त
©अरुण निषाद

डॉ. अरुण कुमार निषाद

निवासी सुलतानपुर। शोध छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय ,लखनऊ। ७७ ,बीरबल साहनी शोध छात्रावास , लखनऊ विश्वविद्यालय ,लखनऊ। मो.9454067032