लघुकथा

सेंटा क्लॉज़

बंटी को पूरा विश्वास था कि इस क्रिसमस पर सेंटा क्लॉज़ उसके लिए उपहार अवश्य छोड़ कर जाएंगे. इस बार वह अच्छा बच्चा बन कर रहा है. समय पर अपना होमवर्क करता था. मम्मी पापा की सारी बात मानता था. दादाजी को रोज़ उनकी दवाइयां लेने में सहायता करता था.
वह पूरी कोशिश कर रहा था कि वह सोए ना सिर्फ सोने का बहाना करे. ताकि वह सेंटा को उपहार रखते देख सके. किंतु सारी कोशिश के बावजूद उसे नींद आ गई. सुबह जब जागा तो सिरहाने एक उपहार रखा था. उसने खोल कर देखा तो रिमोट वाली कार थी. वह सारे घर में उछलता फिर रहा था. सबको कार दिखा रहा था.
घर के बड़े एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे.

*आशीष कुमार त्रिवेदी

नाम :- आशीष कुमार त्रिवेदी पता :- C-2072 Indira nagar Lucknow -226016 मैं कहानी, लघु कथा, लेख लिखता हूँ. मेरी एक कहानी म. प्र, से प्रकाशित सत्य की मशाल पत्रिका में छपी है