अन्य बाल साहित्य

अपनी प्रतिभा को पहचानो

प्रिय बच्चो,

सदा खुश रहो,

आज हम आपसे आपकी प्रतिभा के बारे में कुछ बात करेंगे. हर एक में कोई-न-कोई प्रतिभा छिपी होती है. प्रतिभा का होना अलग बात है, प्रतिभा को पहचानना अलग बात है. कभी व्यक्ति अपनी प्रतिभा को खुद ही पहचान लेता है, कभी माता-पिता-शिक्षक-साथी आदि उसकी प्रतिभा को पहचानकर उसे उसी तरफ बढ़ने को प्रेरित करते हैं. यहीं से उस व्यक्ति की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. अगर वह अपनी प्रतिभा को भलीभांति पालित-पोषित करता है, तो उन्नति की राह पर बढ़ जाता है और जीवन संवार लेता है.

मेरी बहुत-सी छात्राएं ड्राइंग बहुत अच्छी करती थीं. वैसे तो मैं हिंदी पढ़ाती थी, पर मैं अपनी छात्राओं की किसी भी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करती थी. टीचर्स डे या नव वर्ष दिवस पर छात्राएं मुझे ग्रीटिंग कार्ड्स देती थीं. नमिता ने भी एक दिन मुझे बहुत सुंदर कॉर्ड दिया. मुझे वह कॉर्ड प्रिंटेड कॉर्ड जैसा लगा. मैंने पूछा- ”बहुत सुंदर है, यह कहां से लाई हो?” वह बोली- ”मैडम, मैंने बनाया है.” मैं उस कॉर्ड की सुंदरता देखकर हैरान हो गई. उस कॉर्ड को लेकर मैं आर्चीज़ गैलरी गई. उन्होंने नमिता को बुलाकर ऐसे ही अन्य कॉर्ड बनाने का ऑर्डर दिया. अब वह आर्चीज़ गैलरी की नियमित डिज़ाइनर बन गई है. ऐसे ही अनेक प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं लेखन और कला-जगत में धूम मचाए हुए हैं.
एक बात और, अपनी प्रतिभा पहचानने के साथ खुद में आत्मविश्वास बनाए-जगाए रखना. एक छोटे बालक ने बड़े मेहनत एक पेंटिंग बनाई, देखा, परखा और संतुष्ट हुआ. उसने बड़े आत्मविश्वास से वह पेंटिंग अपने ड्राइंगरूम में दीवार पर सजा दी. बड़ा होकर वह बहुत अच्छा कलाकार बना.
आज बस इतना ही, शेष फिर.
आपकी नानी-दादी-ममी जैसी
-लीला तिवानी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

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