धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर की छाया में आकर सभी मनीषी पूर्ण मनीषी होते हैं

ओ३म् पं. चमूपति आर्यसमाज के शीर्ष विद्वान थे। आपने सामवेद के चुने हुए मन्त्रों पर ‘‘सोम सरोवर” नाम से भक्ति भाव पूर्ण से सिक्त रचना की है। महाशय कृष्ण ने इस रचना के विषय में कहा था कि यह एक ऐसी रचना है जिसे नोबेल पुरस्कार दिया जाने चाहिये था। परन्तु वेदों के प्रति पक्षपातपूर्ण […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

क्या जात-पात मिटाई जा सकती है?

ओ३म् आर्यसमाज की पहली पीढ़ी के विद्वानों में एक विद्वान प्रो. सन्तराम जी बी.ए. भी हुए हैं। आप स्वामी श्रद्धानन्द जी के समकालीन थे। आपने अनेक ग्रन्थों का प्रणयन किया। पं. गुरुदत्त ग्रन्थावली के हिन्दी अनुवादक भी आप ही थे। इस समय आपकी एक लघु पुस्तक हमारे सम्मुख है। इस पुस्तक का प्रकाशन श्री रवीन्द्र […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हम सब ईश्वर की सन्तान हैं व ईश्वर हमारा सच्चा माता व पिता है

ओ३म् हमारे माता-पिता कौन हैं? जन्म देने वाले व उसमें सहायक को माता-पिता कहते हैं। हमें अपनी माता से जन्म मिलता है, वह हमारा निर्माण करती है, इसलिए वह हमारी माता कहलाती है। पालन करने से पिता कहलाता है। माता-पिता तो हमारे जन्म में सहायक होते हैं किन्तु हमारा शरीर बनाना और उसमें जीवात्मा को […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर के मुख्य गुण, कर्म व स्वभाव

ओ३म् महर्षि दयानन्द सरस्वती (1825-1883) ने अपने सत्यार्थ प्रकाश आदि ग्रन्थों में ईश्वर के स्वरूप पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला है। इसके आधार पर हम ईश्वर के गुण, कर्म व स्वभाव को भी जान सकते हैं। यह हम सभी का आवश्यक कर्तव्य भी है, इसलिए कि जिस ईश्वर ने हमारे लिए इस सृष्टि को […]

कविता

कविता : रिश्ता

मत जा छोड़ के प्यार भरे ..रिश्ते को तोड़ प्रेम इस मोड़ पर आकर ..क्यूँ हुआ खड़ा हाथ से रेत की तरह छूठ रहा ..हमारा नाता आइस क्रीम की तरह पिगलता ..रहा रिश्ता हर बार समज़ाया पर कोई ..असर न हुआ एक बच्चे जैसे ज़िद पर अडिग ..आप हुए प्यार किसे मिलता है पूरा ..इस […]

कविता

कविता : शक

हक़ दिया तुमने पूरा मुझे , तभी शक होता यार मुँह ना मोड़ मुझसे तू यू , देख तू मेरा वो प्यार किसी छोटी बातों से न , हो यूँ हमेशा ही उदास दुरियाँ हो तो क्या हुआ , हु तो दिल के ही पास जो भी मिला तुमसे मुझे , रखा उसे ख़ूब संभाल […]

कविता

शुभ हो नया साल…

सौंपकर अपनी सारी जिम्मेदारियां दो हजार सत्रह को अलविदा कह रहा हैं साल दो हजार सोलह देकर चंद जरूरी हिदायतें शुभकामनायें भी अनगिनत कि हो मंगलमय आने वाला नया समय न आये कोई भी कठिनाई जो हल हो न सके मुस्कुराकर विदा कर रहा सत्रह अपने उस जन्मदाता को जिसने उसे नवजीवन दिया हमें भी […]

कविता

कदम-कदम आगेे… ।

वर्तमान कहता मुझे सुखमय जीवन का राह दिखाते हुए भूल जाओ अतीत की यादें। आइने में अपने सुंदर छवि को देखते मधुमय उपवन में आराम लेते चमक-धमकों के जग में तुम मशगूल होते अपने को धन्यभागी मानते चलते जाओ.. चलते जाओ..। यह मेरे साथ हो सकता है कैसे.. मेरा तन-मन जो है अतीत की वेदना […]

बाल कविता

*सूरज दादा कहाँ गए तुम*

सूरज  दादा  कहाँ   गए  तुम, काह ईद  का  चाँद  भए तुम।   घना   अँधेरा,  काला – काला, दिन निकला पर नहीं उजाला।   कोहरे   ने   कोहराम  मचाया, पारा  गिर  कर  नीचे  आया।   काले  बादल   जिया   डराते, हॉरर-शो  सा  दृश्य  दिखाते।   बर्षा  रानी   आँख   दिखाती, झम झम झम पानी बरसाती।   काले – काले  […]

हाइकु/सेदोका

हाइकू

​डूबता सूर्य स्वागत करे चाँद आ जा तू वर्ष ————– ​पकी फसलें रच दे इतिहास यादों के दिन. ​—————– ​वर्ष ही लाया खुशियों का तराना राग पुराना. ​————— ​ठण्ड की भेंट नए वर्ष का कोट पहने सभी. ​————— ​नई सौंगाते बाँटता चला गया नया था वर्ष. ​—————- ​क्षण ने बोई दिन की जो फसलें वर्ष […]