Monthly Archives: December 2016


  • मगरूर और मजबूर

    मगरूर और मजबूर

            मगरूर और मजबूर संपत एक दिहाड़ी मजदुर था । नोट बंदी की वजह से कई दिनों से बेरोजगारी की मार झेल रहा संपत आनेवाले उज्जवल भविष्य के लिए आशान्वित था । घर में बचे खुचे...



  • तेरे ख्वाब

    तेरे ख्वाब

    इस   कदर  वो  खुद  को  सताते  चले गए गाफ़िल से अपने दिल को लगाते चले गए दिनभर किया जतन की तुझे याद ना करें फिर रातों को तेरे ख्वाब ही आते चले गए जिसने हमे...


  • मौन

    मौन

      एक बच्चा धीरे से आकर बोला “मैम मैं कुछ कहना चाहता हूँ । थोड़ा सा समय आपका लेना चाहता हूँ”। वो देख रहा था मैं घर निकलने के लिए जल्दी कर रही हूँ।हम एक काव्य...

  • अब हम कैशलेस बन जाएं

    अब हम कैशलेस बन जाएं

    अब हम कैशलेस बन जाएं अपनी चाहतों पे आओ थोड़ा विराम लगाएं चलो हम-तुम अब कैशलेस बन जाएं । जरूरतों को जो पूरा करना है चांद सी दुल्हन को साजन के लिए संवरना है । पैट्रोल-डीजल...

  • विनती

    विनती

    विनती बाबरी की न बात करेंगे तुम्हारी जय दिन-रात करेंगे । हमें हमारा राम मिला दो बाबुजी जल्दी से अब वहीं हमारा मंदिर बनवा दो ।। राम ने तुम्हे सरकार बनाया झोपड़े से कोठी दिलवाया ।...