बाल कहानी

बालकहानी- घमंडी सियार

काननवन में एक सियार रहता था. उस का नाम था सेमलू. वह अपने साथियों में सब से तेज व चालाकी से दौड़ता था. कोई उस की बराबरी नहीं कर पाता था. इस कारण उसे घमंड हो गया था, ” मै सियारों में सब से तेज व होशियार सियार हूँ.” उस ने अपने से तेज़ दौड़ने […]

लघुकथा

मगरूर और मजबूर

        मगरूर और मजबूर संपत एक दिहाड़ी मजदुर था । नोट बंदी की वजह से कई दिनों से बेरोजगारी की मार झेल रहा संपत आनेवाले उज्जवल भविष्य के लिए आशान्वित था । घर में बचे खुचे राशन का कंजुसी से उपयोग कर हालात के सामान्य होने का इंतजार कर रहा था । इसी बीच मथुरा […]

सामाजिक

याद कीजिए ! आप अद्वितीय हैं

  अद्वितीय यानी जिसके जैसा दूसरा न हो. इसे ही अंग्रेजी में यूनिक ( Unique ) भी कहा जाता है. खैर यह बिल्कुल सच भी है कि दुनियाँ का प्रत्येक प्राणी अद्वितीय है. यकीन मानिए आप जैसा न कोई इस दुनियाँ में हुआ है और आने वाले वक्त में न होगा ही. जरा गौर कीजिए, […]

गीतिका/ग़ज़ल पद्य साहित्य

तेरे ख्वाब

इस   कदर  वो  खुद  को  सताते  चले गए गाफ़िल से अपने दिल को लगाते चले गए दिनभर किया जतन की तुझे याद ना करें फिर रातों को तेरे ख्वाब ही आते चले गए जिसने हमे सिखाया मोहब्बत है इक सजा खुद आशिकी की ज़द में वो आते चले गए चल तू नहीं  मिला  तो […]

गीतिका/ग़ज़ल

टूटा हुआ : ग़ज़ल

जो दिया था दिल उन्हें गाता हुआ मिल गया वापस मुझे टूटा हुआ चोरियां उस रात कुछ ज़्यादा हुईं देर तक जिस रात को पहरा हुआ इश्क की उलझन न सुलझी यक दफा हर दफा मैं ही मिला उलझा हुआ अश्क़ ने अपना तआरुफ़ यूँ दिया मैं समन्दर, बूँद में सिमटा हुआ अब किसी सूरत […]

लघुकथा

मौन

  एक बच्चा धीरे से आकर बोला “मैम मैं कुछ कहना चाहता हूँ । थोड़ा सा समय आपका लेना चाहता हूँ”। वो देख रहा था मैं घर निकलने के लिए जल्दी कर रही हूँ।हम एक काव्य गोष्ठी में मिले “हाँ हाँ ! बोलो न । मैं सुन रही हूँ” “जी मैं दहेज का समर्थक हूँ”! […]

कविता

अब हम कैशलेस बन जाएं

अब हम कैशलेस बन जाएं अपनी चाहतों पे आओ थोड़ा विराम लगाएं चलो हम-तुम अब कैशलेस बन जाएं । जरूरतों को जो पूरा करना है चांद सी दुल्हन को साजन के लिए संवरना है । पैट्रोल-डीजल जो अब टंकी में भरना है चाय की चुस्की संग अखबार जो पढ़ना है । सभी भुगतानों में नगदी […]

कविता

विनती

विनती बाबरी की न बात करेंगे तुम्हारी जय दिन-रात करेंगे । हमें हमारा राम मिला दो बाबुजी जल्दी से अब वहीं हमारा मंदिर बनवा दो ।। राम ने तुम्हे सरकार बनाया झोपड़े से कोठी दिलवाया । हमारे सपनों को भी तुम अब साकार बना दो बाबुजी जल्दी से अब बस तुम हमारा मंदिर बनवा दो […]

लेख सामाजिक

कैशलेस पेमेंट: कितने तैयार हम

कैशलेस पेमेंट: कितने तैयार हम 8 नवंबर को केन्द्र सरकार द्वारा 500 व 1000 के नोटों पे पाबंदी लगाए जाने के बाद से ही देश में उपजे पैसों की किल्लत, अनियंत्रित गति से बढ़ते भ्रष्टाचार और नकली पैसों से निजात पाने के लिए देश के प्रधानमंत्री ने सभी देशवासीयों से अब कैशलेस पेमेंट की अपील […]

कविता

ख्वाहिशें

ख्वाहिशें मां बचपन में तेरा मेरी उंगलीयों को थाम चलना सीखाना । गिर जाता जो मैं दौर कर मुझे तेरा कलेजे से लगाना । सारे नखरे सहकर मेरी भूख मिटाना । मेरे मलमूत्रों को अपने आंचल में सुखाना । मेरी गरतीयों पे डांटकर तेरा खुद सिसक जाना । मेरी जरा सी छींक पे तेरा जागकर […]