Monthly Archives: January 2017


  • मुक्तक

    मुक्तक

    उबलते जज्बात पर चुप्पी ख़ामोशी नहीं होती गमों के जड़ता से सराबोर मदहोशी नहीं होती तन के दुःख प्रारब्ध मान मकड़जाल में उलझा खुन्नस में बयां चिंता-ए-हुनर सरगोशी नहीं होती


  • लघुकथा : मेहरबानी

    लघुकथा : मेहरबानी

    बस की खचाखच भीड़ में कई जगह उड़ती हुई नजर डालने के बाद मेरी नजर एक सीट पर टिक गई, जिस पर तीन दुबले-पतले, सींकिया से बदन  के युवक बैठे थे। शायद वहाँ सम्भावना बने, यह सोचकर...


  • आवारा रहने दो

    आवारा रहने दो

    ना बांधो मुझे बंदिशों में मुझे आवारा रहने दो परे रखो साजिशों को मुझे आवारा रहने दो मुझे आवारा रहने दो नहीं चाहिए शोहरत आसमान की नहीं आरजू चमकती-दमकती रात की मुझे टूटा हुआ तारा रहने...

  • चलो तुम साथ मेरे

    चलो तुम साथ मेरे

    आज चलो तुम मेरे साथ लेके हाथों में हाथ आशा रहती है नदियां के पार बैठो कश्ती में और खेओ पतवार सपने हकीकत में बदल जायेंगे जब ये कश्ती पार हम लगायेंगे वहां दिन है खिला...

  • कोशिश

    कोशिश

    इस तस्वीर को माध्यम बनाकर लिखी गई एक छोटी सी कोशिश बनाया है तस्वीर को चित्रकार ने जिसे माना है जीवनदायिनी सारे संसार ने वो अदम्य अद्भुत शक्ति की देवी है जिसकी है असंख्य भुजाएं करती...

  • शहादत

    शहादत

    मेरी छोटी सी कोशिश कैप्टंन अमित देशवाल झज्जर हरियाणा की शहादत को समर्पित तेरी शहादत को नमन तेरी हिमाकत को नमन तेरी एक एक गोली को नमन तेरी खेली होली को नमन तेरे हर गीत को...

  • फुर्सत किसको है

    फुर्सत किसको है

    हर बार किसी तस्वीर को माध्यम बनाकर नहीं लिखा जा सकता कुछ कुछ ऐसे ही प्रतिबिंब और तस्वीरें रहती हैं जो जहन में जगह कर जाती हैं । दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहने का यही...