लघुकथा

लघुकथा – हिस्सा बांट

“माँ जैसे बुआ ने कोर्ट की धमकी देकर पापा से अपना हिस्सा मांग लिया आप भी मामा से अपना हिस्सा मांग लो….” “हा हा हा हा…. इधर आ…. ” दामिनी ने बडे प्यार से छोटी बेटी को अपने पास बिठा कर समझाया “जायदाद दिलाने का हक तो कोर्ट दिला देगा…. पर रिश्ते निभाने का हक […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

उबलते जज्बात पर चुप्पी ख़ामोशी नहीं होती गमों के जड़ता से सराबोर मदहोशी नहीं होती तन के दुःख प्रारब्ध मान मकड़जाल में उलझा खुन्नस में बयां चिंता-ए-हुनर सरगोशी नहीं होती

सामाजिक

आधुनिकता के इस दौर में संस्कृति से समझोता क्यों

आज एक बच्चे से लेकर 80 वर्ष का बुज़ुर्ग आधुनिकता की अंधी दौध में लगा हुआ है आज हम पश्चिमी हवाओं के झंझावत में फंसे हुए है |पश्चिमी देशो ने हमे बरगलाया है और हम इतने मुर्ख की उससे प्रभावित होकर इस दिशा की और भागे जा रहे है जिसका कोई अंत नही है |वास्तव […]

लघुकथा

लघुकथा : मेहरबानी

बस की खचाखच भीड़ में कई जगह उड़ती हुई नजर डालने के बाद मेरी नजर एक सीट पर टिक गई, जिस पर तीन दुबले-पतले, सींकिया से बदन  के युवक बैठे थे। शायद वहाँ सम्भावना बने, यह सोचकर किसी तरह जगह बनाते हुए वहाँ पहुँचा और उनमें से एक युवक को अपनी आवाज में अतिरिक्त मधुरता घोलते हुए […]

लघुकथा

लघुकथा : स्वाभिमान

फोन का रिसीवर हाथ में लेने के बाद से इला “जी”, “हाँ जी” बोले जा रही थी ! बेटे अमित को समझते पल भी नहीं लगा कि दूसरी ओर ताऊजी हैं ! पापा के गुजरने के बाद से शायद ही कोई महीना जाता होगा जब वो उसे या इला को फोन करके उनके द्वारा की […]

कविता

आवारा रहने दो

ना बांधो मुझे बंदिशों में मुझे आवारा रहने दो परे रखो साजिशों को मुझे आवारा रहने दो मुझे आवारा रहने दो नहीं चाहिए शोहरत आसमान की नहीं आरजू चमकती-दमकती रात की मुझे टूटा हुआ तारा रहने दो मुझे आवारा रहने दो बड़े मकानों में रहते छोटे लोग नहीं चाहिए अमीरी मुझे बस बेचारा रहने दो […]

कविता

चलो तुम साथ मेरे

आज चलो तुम मेरे साथ लेके हाथों में हाथ आशा रहती है नदियां के पार बैठो कश्ती में और खेओ पतवार सपने हकीकत में बदल जायेंगे जब ये कश्ती पार हम लगायेंगे वहां दिन है खिला गुलाब-सा चाँद तारों से सजती है रात आज चलो तुम मेरे साथ लेके हाथों में हाथ मिले नहीं तो […]

कविता

कोशिश

इस तस्वीर को माध्यम बनाकर लिखी गई एक छोटी सी कोशिश बनाया है तस्वीर को चित्रकार ने जिसे माना है जीवनदायिनी सारे संसार ने वो अदम्य अद्भुत शक्ति की देवी है जिसकी है असंख्य भुजाएं करती हैं कल्याण संसार का वो रखती है सदैव मातृत्व की छत्रछाया जिसमें फलता फूलता है यह संसार सारा कभी […]

कविता

शहादत

मेरी छोटी सी कोशिश कैप्टंन अमित देशवाल झज्जर हरियाणा की शहादत को समर्पित तेरी शहादत को नमन तेरी हिमाकत को नमन तेरी एक एक गोली को नमन तेरी खेली होली को नमन तेरे हर गीत को नमन तेरी इस जीत को नमन तिरंगे में लिपटे ताबूत को नमन फौजी तेरे लहू सबूत को नमन इक […]

कविता

फुर्सत किसको है

हर बार किसी तस्वीर को माध्यम बनाकर नहीं लिखा जा सकता कुछ कुछ ऐसे ही प्रतिबिंब और तस्वीरें रहती हैं जो जहन में जगह कर जाती हैं । दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहने का यही कारण है कि जिस प्रकार की व्यवस्था, जीवन ,जिंदगी मैं दिल्ली में देखता हूं। बस वही भाव मेरी कलम […]