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वैवाहिक स्वर्ण जयन्ति पर “लक्ष्मण की कुण्डलियाँ” का विमोचन सम्पन्न

माँ शारदा की कृपा, मात-पिता का आशीर्वाद एवम् बुजर्गो की शुभ कामनाओं से प्रथम काव्य संकलन के 3 माह बाद ही गुरु गोविन्द सिंह जयन्ति दि. 5 जनवरी,2017 को मेरी वैवाहिक स्वर्ण जयन्ति पर द्वित्तीय काव्य संकलन “लक्ष्मण की कुण्डलिया” का विमोचन वयोवृद्ध एवम् वरिष्ठ कवि मान्यवर मुकुट सक्सेना जी के कर कमलो से सम्पन्न हुआ ।

दीप प्रज्वलित कर गणपति पूजन पर कवयित्री शोभा चन्द्र द्वारा गणेश स्तुति एवम् ममता लड़ीवाल द्वारा सरस्वती वन्दना के साथ प्रारम्भ समारोह में लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला द्वारा मुख्य अतिथि श्री मुकुट सक्सेना जी को पुष्पहार पहना कर एवम् शाल ओढ़ाकर स्वागत किया गया ।इस अवसर पर ममता लड़ीवाल द्वारा कवितालोक के संस्थापक श्री ओम नीरव जी का प्राप्त सन्देश पढ़कर सुनाया –

सम्मान्य लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी ! आपके भाव-भरे एवं शिल्प-समृद्ध कुंडलिया छंदों का संग्रह ‘लक्ष्मण की कुण्डलिया’ वस्तुतः आपकी सतत छंद साधना और साहित्य के प्रति समर्पण भावना का सुफल है। आपके पावन परिणय की स्वर्ण जयंती के सुअवसर पर हो रहे इस कृति के लोकार्पण पर मैं हृदय तल से अपनी शुभकामनाएँ अर्पित करता हूँ। अल्प समय में रेल-आरक्षण न हो पाने के कारण मैं भौतिक रूप से इस अनमोल कृति के लोकार्पण के सुअवसर पर उपस्थित नहीं हो पा रहा हूँ किन्तु मेरा स्नेह-आशीष सदैव आपके साथ है। मैं पुनः-पुनः आपके और आपकी इस कृति के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करता हूँ ! शुभमस्तु !

कुण्डलिया साहित्य में, है लक्ष्मण का नाम।
श्रेष्ठ साधना लगन का, सुंदरतम परिणाम।
सुंदरतम परिणाम, साधना का यह संग्रह,
बनकर स्वर्णिम सूर्य, व्योम में दहके दह-दह।
पंक्ति-पंक्ति से सीख, सदा ले यह जग छलिया,
वाणी का वरदान,कि ‘लक्ष्मण की कुण्डलिया। – ओम नीरव

मेरे ज्येष्ठ पुत्र श्री योगेन्द्र लडीवाला ने मेरा अति संक्षिप परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि विवाह के बाद पापा ने अपना अधिकाँश समय समाज सेवा में समर्पित किया और दहेज़ विरोधी प्रदर्शनो का नेतृत्व एवम् सामाजिक पत्र-पत्रिकाओ का सम्पादन किया । इसके बाद मेरे द्वारा कुण्डलिया छ्न्द की संक्षिप्त जानकारी देते हुए पुस्तक में से माँ शारदा, मात-पिता, सामाजिक सरोकार,कालेधन आदि समसामयिक विषयों पर रचित कुण्डलियाँ सुनायी जन्हें श्रोताओ ने खूब सराहा।
मुख्य अतिथि श्री सक्सेना जी ने अपने सम्बोधन में बताया की लुप्त होते कुण्डलिया छ्न्द विधा पर लडीवाला जी की यह कृति नीति, व्यवहार और सामजिक चेतना जाग्रत करने हेतु पाठको को प्रभावित करने में सक्षम है । सहज सरल पर, प्रभावपूर्ण छन्दों से साहित्य जगत में इसका व्यापक स्वागत किया जाएगा ।
कवि-गोष्ठी में प्रमुख रूप से श्री चन्द्र प्रकाश पारीक, ममता लडीवाल और संचालिका वरिष्ठ कवयित्री शोभा चन्दर जी ने नारी पीड़ा पर मार्मिक गीत रचनाए प्रस्तुत की जिन पर सभी श्रोताओ की तालियों की गडाहट से हाल गूँज उठा । इसी कड़ी में मुख्य अतिथि ने राधा-कृष्ण की भावनाओं को कवित्व शैली में प्रतुति दी जिसे खूब सराहां गया ।
इसके बाद रिंग सेरेमनी और ममता लडीवाल के संयोजन में मनोरंजन एवं नृत्य आदि कार्यक्रम व प्रीतिभोज के साथ समारोह सम्पन्न हुआ ।

प्रस्तुति- लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

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