लघुकथा : मेहरबानी

बस की खचाखच भीड़ में कई जगह उड़ती हुई नजर डालने के बाद मेरी नजर एक सीट पर टिक गई, जिस पर तीन दुबले-पतले, सींकिया से बदन  के युवक बैठे थे। शायद वहाँ सम्भावना बने, यह सोचकर किसी तरह जगह बनाते हुए वहाँ पहुँचा और उनमें से एक युवक को अपनी आवाज में अतिरिक्त मधुरता घोलते हुए पुकारा- “भाई साहब, ओ भाई साहब !”
“क्या है  ?” खीझ ही उठा वह युवक ।
“भाई साहब ! ये मेरी माँ जी हैं ।बहुत बीमार हैं। खड़ी नहीं रह सकतीं।थोड़ी मेहरबानी करिए। थोड़ा खिसक जाइए और इन्हें बैठा लीजिए ।”
करीब-करीब गिड़गिड़ाते हुए कहा मैंने ।
वह बिफर ही पड़ा -“बीमार हैं, तो मैं क्या करूँ ! मैंने समाजसेवा का ठेका लिया है क्या? तीन की सीट है, तीन लोग बैठे हैं, बस इतना काफी है।”
मैं ठक्क रह गया । आसपास के यात्री उस युवक को आग्नेय नेत्रों से घूर-घूरकर निहारने लगे, फिर उनकी नजरें माँ की ओर घूमीं ।लगा, माँ जी के प्रति सहानुभूति का अथाह समुद्र ही उमड़ पड़ा हो जैसे और पल-दो पल में जरूर कोई न कोई कहने वाला है – आइए माँ जी, यहाँ बैठ जाइए ।पर ऐसा कुछ न हुआ।अगले ही पल हर कोई अपने-अपने धुन में खो गया। माँ जी किसी तरह कराहते-काँखते हुए गैलरी में ही उकड़ूँ होकर बैठ गईं ।
कुछ देर बाद बस एक स्टाॅप पर रुकी, तो बस के अगले दरवाजे से एक खूबसूरत लड़की की ‘इन्ट्री’ हुई  ।उसने भी मेरी ही तरह पूरे बस का उड़ती हुई नजरों से मुआयना किया, फिर मुस्कराते हुए आगे बढ़ी। आश्चर्य ! इस बार ‘समाजसेवा का कोई ठेका न ले रखने वाले युवक’ ने खुद ही खिसककर उस लड़की के बैठने की जगह बना दी। वह सीट पर धप्प से बैठ गई और एक तेज साँस खींचकर बोली-ओह ,माई गाॅड !
बहुत गर्दी है । लोग ऐसे भरे हैं, जैसे जानवर ! ”
“अम्माँ जी, आपकी तबीयत खराब है?” तभी वह बगल में बैठी कराह रहीं माँ जी को देख चौंक पड़ी ।
“हाँ बिटिया, कुछ ज्यादा ही।” माँ जी मुश्किल से बोल पाईं ।
“आओ, आप बैठ जाओ ।मैं खड़ी हो जाती हूँ ।” कहते-कहते वह उठकर गैलरी में आ खड़ी हुई ।
मैं कराहती हुई माँ जी को सहारा देकर सीट पर बैठा रहा था और गौर से देख रहा था, उस युवक का चेहरा खीझ, विवशता और अनायास ही जैसे ‘कुछ’ खो देने के भाव से रक्तिम हो उठा था ।
— मुन्नू लाल, बलरामपुर

परिचय - मुन्नू लाल

नाम- मुन्नू लाल
जन्मतिथि- 15 मार्च,1970
सम्प्रति- अध्यापक, बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर
प्रदेश
प्रकाशन- शुभतारिका, झंकृति, सामाजिक आक्रोश,
नन्दन, चम्पक, नन्हे सम्राट, अट्ठहास इत्यादि पत्र-
पत्रिकाओं में लघुकथाएँ, कहानियाँ, बाल कहानियाँ
व व्यंग्य प्रकाशित
पुरस्कार- राज्य संसाधन केन्द्र, लखनऊ (उ.प्र.) द्वारा
2001 में आयोजित नवसाक्षर साहित्य लेखन
प्रतियोगिता में दो प्रविष्टियाँ पुरस्कृत व
पुस्तिकाकार प्रकाशित
संपर्क- ग्राम-पुरूषोत्तमपुर, पोस्ट-सोनपुर, वाया
गैसड़ी, जिला- बलरामपुर-271210 (उत्तर प्रदेश)
मो0नं0-09919028165