लघुकथा – हिस्सा बांट

“माँ जैसे बुआ ने कोर्ट की धमकी देकर पापा से अपना हिस्सा मांग लिया आप भी मामा से अपना हिस्सा मांग लो….”

“हा हा हा हा…. इधर आ…. ” दामिनी ने बडे प्यार से छोटी बेटी को अपने पास बिठा कर समझाया “जायदाद दिलाने का हक तो कोर्ट दिला देगा…. पर रिश्ते निभाने का हक दुनिया की कोई कोर्ट नही दिला सकती…. इसे हमे ही निभाना है”

“तो बुआ ने क्यो बंटवारा कराया…. मे भी भाई से अपना हिस्सा बांट करूंगी ”

“पगली हिस्सा बांट भाई-भाई मे होता है… बहन-भाई मे नही….बहन-भाई मे सिर्फ प्यार और त्याग होता है ”

दरवाजे पर खडा दामिनी का भाई माँ बेटी की सारी बातें सुन रहा था। “अरे तू कब आया… बहां क्यो खडा है… चल आ जल्दी कब से राह देख रही राखी बांधने के लिये ”

भाई ने बहन के पैर छुए और बोला “ये रहा आपका गिफ्ट” देश के टॉप कालेज मे एडमिशन कार्ड और फीस रसीद! मेरे रहते मेरी भान्जियों की पढाई रूके ये मामा ऐसा नहीं होने देगा ” दामिनी की आंखों से आंसू टपक पडे. ये सब देखकर छोटी बेटी रिश्तो का मोल समझ रही थी जो कोई कोर्ट नही समझा सकता था.

— रजनी

परिचय - रजनी विलगैयाँ

शिक्षा : पोस्ट ग्रेजुएट कामर्स, गृहणी पति व्यवसायी है, तीन बेटियां एक बेटा, निवास : बीना, जिला सागर