राजनीति

भारतवर्ष फिर सोनें की चिडि़या कहलायेगा

भारतवर्ष फिर सोनें की चिडि़या कहलायेगा आजादी के 70 साल बाद यदि किसने ने क्रांतिकारी रूख अख्तियार किया है वह नरेन्द्र मोदी। इसमें कोई शक नही कि इन्होनंे जो कार्य किया है वह सहराहनीय है, नोट बंदी को लेकर आनें वाले समय में उम्मीद लगायी जा रही है कि देश की गरीब जनता को कुछ […]

बाल कविता

बालकविता “लगता एक तपस्वी जैसा”

बगुला भगत बना है कैसा? लगता एक तपस्वी जैसा।। अपनी धुन में अड़ा हुआ है। एक टाँग पर खड़ा हुआ है।। धवल दूध सा उजला तन है। जिसमें बसता काला मन है।। मीनों के कुल का घाती है। नेता जी का यह नाती है।। बैठा यह तालाब किनारे। छिपी मछलियाँ डर के मारे।। पंखों को […]

सामाजिक

लेख : संतोष

मनुष्य का मन कभी संतुष्ट नहीं होता। जितना प्राप्त करता है उतनी ही इसकी प्यास बढ़ती जाती है। ये हमेशा एक ही मंत्र का जाप करता रहता है “और” “और” “और”। एवं हम भी विक्षिप्तों की भाँति इसकी मांग पूर्ण करने के प्रयासों में जुटे रहते हैं। बिना ये सोचे-समझे कि इसकी तृष्णा का तो […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

दुनिया में किसी को भी रूलाना मतमज़लूमों के दिल को दुखाना मत नेकी कर के दरिया में बहा देनाकरो एहसान कोई तो जताना मत भरम यारों का रखना हो जो कायम तोमुसीबत में किसी को आज़माना मत खुल के तू यहां मिलना भले सबसेकिसी को राज़ पर कोई बताना मत वक्त अच्छा-बुरा आता ही है […]

लघुकथा

हौसला

“लेखन का क्या हाल-चाल चल रहा है “? बहुत दिनों से प्रभा का लिखा कुछ दिखा नहीं तो ज्योत्सना पूछ बैठी । प्रभा लेखन कार्य में बहुत होशियार थी लेकिन अपने छोटे भाई के अचानक गुज़र जाने से स्तब्ध हो लेखन छोड़ बैठी थी । बिल्कुल बंद है दी अभी तो क्यूँ ? पता नहीं, राकेश […]

इतिहास लेख

एक महान सती थी “पद्मिनी”

एक सती जिसने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया उसकी मृत्यु के सैकड़ों वर्ष बाद उसके विषय में अनर्गल बात करना उसकी अस्मिता को तार-तार करना कहां तक उचित है | ये समय वास्तव में संस्कृति के ह्रास का समय है कुछ मुर्ख इतिहास को झूठलाने का प्रयत्न करने […]

कविता

आया मधुऋतु का त्योहार

खेत-खेत   में   सरसों  झूमे,  सर-सर  वहे  वयार, मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार। धानी  रंग  से  रंगी धरा, परिधान   वसन्ती  ओढ़े। हर्षित  मन  ले लजवन्ती, मुस्कान   वसन्ती   छोड़े। चारों  ओर  वसन्ती  आभा,  हर्षित  हिया  हमार, मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार। सूने-सूने  पतझड़  को  भी, आज वसन्ती  प्यार मिला। प्यासे-प्यासे  से […]

लघुकथा

पीली साड़ी

“क्या सोच रही हो वाणी अम्मा! अब तुम्हारा सुपुत्र नहीं आने वाला, यह चौथा बसंत है और उसने तुम्हारी सुध नहीं ली, क्या अब भी आस बाकी है”? -क्यों नहीं, तुम शायद भूल गई हो, पिता की मृत्यु के बाद उनका विधि-पूर्वक क्रियाकर्म उसीने आकर करवाया था और मुझे अकेली देखकर पूरी सुखसुविधा वाले इस […]

कहानी

कहानी : साहिबा

साहिबा जैसा कि नाम से ही लग रहा है सबके दिल में रहने वाली हमेशा हसने वाली और दूसरो के साथ खुद को खुश रखने वाली । जो भी चाहती उसे मिल जाता परिवार में भी सबसे छोटी होने के वजह खूब चलती ।लेकिन धीरे धीरे सब बदलने लगा और खुशियां रुठने लगीं । पहले […]

लघुकथा

डर

अमर एक चौबीस वर्षीय युवक था । गांव के ही दबंग के खिलाफ एक मुकदमे में गवाही देने की वजह से गाँव में रहना अब उसके लिए खतरे से ख़ाली नहीं था । डर के मारे अमर पास के ही शहर में अपनी पहचान छिपाकर रहने लगा । उसने सोचा था यहाँ  आकर कोई छोटा […]