Monthly Archives: January 2017



  • लेख : संतोष

    लेख : संतोष

    मनुष्य का मन कभी संतुष्ट नहीं होता। जितना प्राप्त करता है उतनी ही इसकी प्यास बढ़ती जाती है। ये हमेशा एक ही मंत्र का जाप करता रहता है “और” “और” “और”। एवं हम भी विक्षिप्तों की...

  • गज़ल

    गज़ल

    दुनिया में किसी को भी रूलाना मतमज़लूमों के दिल को दुखाना मत नेकी कर के दरिया में बहा देनाकरो एहसान कोई तो जताना मत भरम यारों का रखना हो जो कायम तोमुसीबत में किसी को आज़माना...

  • हौसला

    हौसला

    “लेखन का क्या हाल-चाल चल रहा है “? बहुत दिनों से प्रभा का लिखा कुछ दिखा नहीं तो ज्योत्सना पूछ बैठी । प्रभा लेखन कार्य में बहुत होशियार थी लेकिन अपने छोटे भाई के अचानक गुज़र...

  • एक महान सती थी “पद्मिनी”

    एक महान सती थी “पद्मिनी”

    एक सती जिसने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया उसकी मृत्यु के सैकड़ों वर्ष बाद उसके विषय में अनर्गल बात करना उसकी अस्मिता को तार-तार करना कहां तक उचित है...

  • आया मधुऋतु का त्योहार

    खेत-खेत   में   सरसों  झूमे,  सर-सर  वहे  वयार, मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार। धानी  रंग  से  रंगी धरा, परिधान   वसन्ती  ओढ़े। हर्षित  मन  ले लजवन्ती, मुस्कान   वसन्ती   छोड़े। चारों  ओर  वसन्ती  आभा,  हर्षित  हिया ...

  • पीली साड़ी

    पीली साड़ी

    “क्या सोच रही हो वाणी अम्मा! अब तुम्हारा सुपुत्र नहीं आने वाला, यह चौथा बसंत है और उसने तुम्हारी सुध नहीं ली, क्या अब भी आस बाकी है”? -क्यों नहीं, तुम शायद भूल गई हो, पिता...


  • डर

    डर

    अमर एक चौबीस वर्षीय युवक था । गांव के ही दबंग के खिलाफ एक मुकदमे में गवाही देने की वजह से गाँव में रहना अब उसके लिए खतरे से ख़ाली नहीं था । डर के मारे...