Monthly Archives: January 2017


  • कभी देखा है ?

    कभी देखा है ?

    कभी चिड़ियों को चहचहाते देखा है ? कभी भवरों को गुनगुनाते देखा है ? कभी बच्चों को खिलखिलाते देखा है ? कभी  सूरज को उगते डूबते देखा है ? देखना है तो आँख बंद करके देखो...

  • गज़ल

    गज़ल

    यारी में मतलब की मिलावट मैं नहीं करता, सच्ची बात कहता हूँ बनावट मैं नहीं करता, जहां तक साथ दे कोई वहां तक ही गनीमत है, किसीसे भी कोई शिकवा शिकायत मैं नहीं करता, यूँ शतरंजी...

  • क्या हमें आजादी मिल गयी  ?

    क्या हमें आजादी मिल गयी ?

    १५ अगस्त १९४७ को ब्रिटिश हुकूमत इस देश को इन देश वासियों के हवाले कर उन्हें अपनी गुलामी से मुक्त कर गयी । अपनी बनाई ट्रेनें, पटरियां, इमारतें, कारें, बसें, मशीनें इत्यादि कई चीजें वह यहीं...

  • इंग्लिश पब्ब

    इंग्लिश पब्ब

    इंग्लैंड में रहते हुए अगर पब्ब की बात ना करें तो इंग्लैंड का सब कुछ अधूरा है। भारत में हलवाइयों की दुकानें और ढाबों के बारे में कुछ ना बोलें तो सब कुछ फीका फीका लगेगा...

  • ये हैं असली नायिकाएँ

    ये हैं असली नायिकाएँ

    भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है ।इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया जाता...

  • जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई

    जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई

    मनीषा का बचपन खेल-कूद में कम और घर का काम करने में ज़्यादा बीता. घर में सदस्य ज़्यादा- कमाने वाले कम, खाने वाले ज़्यादा- खाना कम, ऐसे ही समय बीतता गया. किसी तरह पढ़ने का मौका...

  • गणतंत्र

    गणतंत्र

    खंड खंड कर राज फिरंगी गणतंत्र मनाते हैं। हम भारत माँ के लाल – तिरंगा फहराते हैं । देशभक्ति के नारों में भारत की गरिमा की है। देश -विदेशी हर अधरों पे – तेरी महिमा है...


  • कवि और कविता

    कवि और कविता

    मनोभाव से क्या कविता का प्रादुर्भाव होता है ? विचार रखने में क्या हम कविता की परिधि में आ सकते हैं ? भावों को स्पष्ट करना, अपनी बात ऊपर रखना मंच -मंच पर टहलना , अपनी...