कविता

मैं जी लूँगा किसी तरह

  मैं जी लूँगा किसी तरह , जिस हाल प्रभु की इच्छा हो, केवल मुझको दिखलाने भर , मत झूठा इज़हार करो, कह दो मन में प्यार नहीं है ,या फिर मुझसे प्यार करो मुझे भरमाने की खातिर, तुम मत झूठे इकरार करो मैं वफ़ा करूँ,तुम बेवफ़ा रहो यह मुझको तो मंज़ूर नहीं चाहत की […]

कविता

कभी देखा है ?

कभी चिड़ियों को चहचहाते देखा है ? कभी भवरों को गुनगुनाते देखा है ? कभी बच्चों को खिलखिलाते देखा है ? कभी  सूरज को उगते डूबते देखा है ? देखना है तो आँख बंद करके देखो अपने अंदर के खजाने को कभी देखा है ? नदी को कलकल बहते हुए देखा है ? घोड़े को […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

यारी में मतलब की मिलावट मैं नहीं करता, सच्ची बात कहता हूँ बनावट मैं नहीं करता, जहां तक साथ दे कोई वहां तक ही गनीमत है, किसीसे भी कोई शिकवा शिकायत मैं नहीं करता, यूँ शतरंजी चालों से वाकिफ मैं बखूबी हूँ, रिश्तों में मगर दिल के सियासत मैं नहीं करता, अमीर-ए-शहर हैं वो और […]

सामाजिक

क्या हमें आजादी मिल गयी ?

१५ अगस्त १९४७ को ब्रिटिश हुकूमत इस देश को इन देश वासियों के हवाले कर उन्हें अपनी गुलामी से मुक्त कर गयी । अपनी बनाई ट्रेनें, पटरियां, इमारतें, कारें, बसें, मशीनें इत्यादि कई चीजें वह यहीं छोड़ गए क्योंकि यह उनकी मजबूरी थी वह इन चीजों को अपने साथ नहीं ले जा सकते थे । […]

लेख

इंग्लिश पब्ब

इंग्लैंड में रहते हुए अगर पब्ब की बात ना करें तो इंग्लैंड का सब कुछ अधूरा है। भारत में हलवाइयों की दुकानें और ढाबों के बारे में कुछ ना बोलें तो सब कुछ फीका फीका लगेगा क्योंकि खाना पीना ज़िन्दगी का एक अहम् हिस्सा है। खाने पीने के बगैर तो हम जी ही नहीं सकते […]

राजनीति

ये हैं असली नायिकाएँ

भंसाली का कहना है कि पद्मावती एक काल्पनिक पात्र है ।इतिहास की अगर बात की जाए तो राजपूताना इतिहास में चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का नाम बहुत ही आदर और मान सम्मान के साथ लिया जाता है। भारतीय इतिहास में कुछ औरतें आज भी वीरता और सतीत्व की मिसाल हैं जैसे सीता द्रौपदी संयोगिता और […]

लघुकथा

जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई

मनीषा का बचपन खेल-कूद में कम और घर का काम करने में ज़्यादा बीता. घर में सदस्य ज़्यादा- कमाने वाले कम, खाने वाले ज़्यादा- खाना कम, ऐसे ही समय बीतता गया. किसी तरह पढ़ने का मौका मिला, उसका लाभ उठाया और मैट्रिक, बी.ए, एम.ए कर ली. अध्यापिका की नौकरी की, साथ में ट्यूशंस भी. विवाह […]

कविता

गणतंत्र

खंड खंड कर राज फिरंगी गणतंत्र मनाते हैं। हम भारत माँ के लाल – तिरंगा फहराते हैं । देशभक्ति के नारों में भारत की गरिमा की है। देश -विदेशी हर अधरों पे – तेरी महिमा है । सवा अरब जनता नित झुकती -शान तिरंगा है। उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम -जान तिरंगा है । उत्तर खड़ा […]

मुक्तक/दोहा

मिटाने अँधेरा चला दीप जैसे

मिटाने अँधेरा चला दीप जैसे, निशा खिलखिलाती बताते रहे हम । कहाँ का अँधेरा मिटाने चला तू, सदा रोशनी दिल लगाते रहे हम । कभी चाँद तारे निशा को सँवारे, दिले राज खुद से बताने लगे हैं। मिले रातरानी गुलाबी दिलों की, यही प्यास मन से छिपाते रहे हम । — राजकिशोर मिश्र ‘राज’ प्रतापगढी

भाषा-साहित्य

कवि और कविता

मनोभाव से क्या कविता का प्रादुर्भाव होता है ? विचार रखने में क्या हम कविता की परिधि में आ सकते हैं ? भावों को स्पष्ट करना, अपनी बात ऊपर रखना मंच -मंच पर टहलना , अपनी रचना थोप देना , दूसरे रचनाकारों की रचना पर भूलकर कभी पसंद प्रतिक्रिया देना क्या यही आपकी कविता का उद्देश्य […]