गीतिका/ग़ज़ल

गजल

तनहाई को मीत बनाओ तो जानूँ! गम को अपने गीत सुनाओ तो जानूँ! * लौ से मिलकर जले न कोई परवाना, प्रीत की ऐसी रीत चलाओ तो जानूँ ! * नरम दिलों को पत्थर होते देखा है , पत्थर को नवनीत बनाओ तो जानूँ ! * सभी कोसते रहते काली रातों को, आगे बढ़कर दीप […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेद की आज्ञा मनुर्भव और कृण्वन्तो विश्वमार्यम् के आदर्श पालक महर्षि दयानन्द

ओ३म् वेद ईश्वरीय ज्ञान है। ईश्वर प्रदत्त ज्ञान होने के कारण वेद पूर्णतः तर्क व युक्ति संगत होने के साथ विज्ञान के अनुकूल भी हैं। वेदों में ‘मनुष्य को मनुष्य बनने’ की शिक्षा है। मनुष्य का अर्थ होता है मननशील होना। क्या हम मननशील हैं? मननशील मनुष्य मनन अर्थात् सत्य व असत्य का विचार व […]

इतिहास

शीर्ष वैदिक विद्वान डा. रघुवीर वेदालंकार और उनकी पुस्तक ‘ध्यान तथा उपासना

ओ३म् डा. रघुवीर वेदालंकार जी की एक कृति ‘ध्यान तथा उपासना’ है जिसका प्रकाशन सत्यधर्म प्रकाशन, रोहतक से सन् 1906 में हुआ था। हमने अप्रैल सन् 2007 में गुवाहटी की यात्रा की थी और वहां अपनी पुत्री के पास कुछ दिन रहे थे। उसी बीच रेलयात्रा और गुवाहटी प्रवास में हमने इस पुस्तक को पढ़ा […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेदों की रक्षा और आर्यसमाज

ओ३म् वेदर्षि दयानन्द (1825-1883) ने अपने अपूर्व पुरुषार्थ और वैदिक ज्ञान से वेदों का पुनरुद्धार किया था। वह सारे संसार को आर्य व वेदानुयायी बनाना चाहते थे परन्तु संसार के लोग उनकी जनहितकारी व लोक कल्याण की भावना को समझ नहीं पाये और उनसे असहयोग करते रहे। ऐसे ही लोगों ने षडयन्त्र रचे और महर्षि […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुष्य के पतन का एक मुख्य कारण लोभ की प्रवृत्ति

ओ३म् काम, क्रोध, लोभ व मोह मनुष्य के प्रबल शत्रु हैं जो मनुष्य का जीवन नष्ट कर देते हैं। मनुष्य मदिरा के नशे की भांति जीवन में इनके वशीभूत रहता है। इनसे बचने का उपास केवल अविद्या का नाश है जिसके अनेक उपाय हैं, परन्तु बहुत से लोगों को इन उपायों का ज्ञान नहीं है। […]

कविता

ऐसा ही कुछ करना होगा

  लम्बे अर्से बीत चले हैं, इनसे कुछ सबक लेना होगा, उम्मीदों की सतत् कड़ी में, इस बार नया कुछ बुनना होगा, अपने समाज के अन्तिम जन को, अब तो बेहतर करना होगा, शिक्षित और जागरूक बनाकर, इनके हक में लड़ना होगा, कुछ न कुछ पाने का सबका, अपना अपना सपना होगा, सूख चुके आँसुओं […]