Monthly Archives: January 2017


  • कंबल

    कंबल

    ठण्डक से ठिठुरते होरी ने नेताजी से पूछा-  “साहब वोट कब पड़ेंगे?” “अभी तो जनवरी चल रही है, अप्रैल में पड़ेंगे।” नेताजी ने जबाब दिया। ‘जल्दी पड़ते तो तन ढकने को एक कंबल ही मिल जाता।’ अपनी...

  • यही सच  है

    यही सच है

    नये साल की चहल-पहल उत्साह समय का उन्मेश चहूँ ओर के उल्लास चसके मुझे रिझा नहीं पाता अनायास मेरे अंतरंग में निर्लिप्तता की रसाई अपने आप आ जाती विगत जीवन का ढ़ोर मेरे अंतर्जग में ढोली...

  • गजल

    गजल

    तनहाई को मीत बनाओ तो जानूँ! गम को अपने गीत सुनाओ तो जानूँ! * लौ से मिलकर जले न कोई परवाना, प्रीत की ऐसी रीत चलाओ तो जानूँ ! * नरम दिलों को पत्थर होते देखा...



  • वेदों की रक्षा और आर्यसमाज

    ओ३म् वेदर्षि दयानन्द (1825-1883) ने अपने अपूर्व पुरुषार्थ और वैदिक ज्ञान से वेदों का पुनरुद्धार किया था। वह सारे संसार को आर्य व वेदानुयायी बनाना चाहते थे परन्तु संसार के लोग उनकी जनहितकारी व लोक कल्याण...



  • ऐसा ही कुछ करना होगा

      लम्बे अर्से बीत चले हैं, इनसे कुछ सबक लेना होगा, उम्मीदों की सतत् कड़ी में, इस बार नया कुछ बुनना होगा, अपने समाज के अन्तिम जन को, अब तो बेहतर करना होगा, शिक्षित और जागरूक...