आइए कविता लिखना सीखें- 2

प्रिय बच्चो,
सदा खुश रहिए,

पिछले महीने हमने कविता-लेखन का एक नया प्रयास शुरु किया था. आशा है, आपने इस प्रयास से कुछ सीखा होगा और कविता की कुछ पंक्तियां मन में सोची होंगी. हमारे एक पाठक रविंदर सूदन ने जन्मदिन पर कुछ पंक्तियां लिख भेजी हैं-

अपने मन को क्या जवाब दूं ?
अपनी बहन को क्या उपहार दूं ?
कोई अच्छा सा फूल होता तो
माली से मांगता
जो खुद ही गुलाब हो उसे क्या गुलाब दूं?

होली-
होली आई, होली आई,
रंग-अबीर-गुलाल भी लाई,
प्रेम-रंग में सबको रंग लो,
गुझिया के संग मस्ती छाई.

सर्दी-
सर्दी आई, स्वेटर लाई,
लाई कंबल और रज़ाई,
टोपी-मफलर रंगबिरंगे,
गजक-रेवड़ी हमको भाई.

चंदामामा-

चंदामामा आए हैं,
साथ चंदनिया लाए हैं,
ढेरों टॉफियां लेकर आए,
इसीलिए हमें भाए हैं.

अगली बार आप भी कुछ लिखकर भेजेंगे, इसी आशा के साथ-

आपकी नानी-दादी-ममी जैसी

-लीला तिवानी

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।