कुंवारों का गांव

आज एक चुटकुला पढ़ा-
”पिता से बढ़कर
चिंटू: मैंने अपनी वाइफ को 12वीं पास करवाई, फिर बी. ए और अब एम. ए. भी करवा दी. अब क्या करूं?

मिंटू: तू तो उसके लिए पिता से भी बढ़कर है. अब अच्छा लड़का देखकर, उसकी शादी कर दे.”

इस मज़ेदार चुटकुले के बाद हम अपने शादी से संबंधित ब्लॉग ‘कुंवारों का गांव’ की ओर चलते हैं, लेकिन उससे पहले शादी से संबंधित अफ्रीका के एक नगर की इससे विपरीत कानून का जायज़ा लेते हैं. अफ्रीका के एरीटीरिया में पुरुष को दो शादियां करने का कानून है. वहां स्त्रियों की संख्या अधिक होने के कारण हर पुरुष को दो कानूनन दो शादियां करनी ही पड़ती हैं. पुरुष की पहली पत्नि अगर पति की दूसरी शादी में अड़ंगा लगाती है, तो उसको सजा भी हो सकती है. अब जायज़ा लेते हैं अपने देश के कुंवारों के गांव का.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से महज 8 किलोमीटर दूर बक्शी का तालाब इलाके में एक ऐसा गांव है जहां लोगों की शादी ही नहीं हो पा रही. गोसाइनपुरवा नाम के इस गांव में बसे करीब 50 घरों में कोई रिश्ता नहीं जोड़ना चाहता. इसकी वजह गांव में बिजली न आना है. आजादी के बाद से इस गांव के लोगों को बिजली का इंतजार है. आप लोग जानते ही हैं, कि आजकल उत्तर प्रदेश में चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. गांव वालों का आरोप है कि जब चुनाव आता है तो नेता वादा करते हैं, फिर अगले चुनाव तक नजर नहीं आते हैं. गांव की महिलाओं ने तो इस बार वोट न देने का फैसला किया है.

यहां हम आपको यह बताते चलें, कि इस गांव में बिजली के खंभे लग गए हैं. खंभे लगे तो उम्मीद जगी कि बिजली आ जाएगी, लेकिन एक वर्ष के बाद अब तक खंभों पर तार तक नहीं लगे हैं. जिन लोगों के गांव के अलावा शहर में घर हैं, उनके घर में तो शहनाई बजती है, लेकिन जो गांव में रहते हैं उनके यहां शहनाइयां नहीं गूंजती.

शादी की इस समस्या के अलावा भी कई समस्याएं हैं. गांव में लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए भी दूसरे गांवों में जाना पड़ता है या फिर आसपास की फैक्ट्री में. बिजली के बिना बहुत परेशानी होना स्वाभाविक ही है. बिजली और पानी की समस्या के लिए कई बार स्थानीय विधायक और अन्य जिम्मेदारों के पास गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. और तो और गांव के लोगों को एक लीटर मिट्टी का तेल तक नहीं मिल पाता. ऐसे में लोग अक्सर अंधेरे में रहने को मजबूर रहते हैं. बिजली न आने से पढ़ाई में बहुत दिक्कत होती है. ऐसे में इस गांव में न कोई अपनी बेटी की शादी करना चाहेगा, न कोई लड़की ही इस बात के लिए राज़ी होगी. एक शादी तक न होना भी ठीक नहीं है, कानूनन दो-दो शादियों के लिए मजबूर होना भी मुसीबत है.

बहरहाल अफ्रीका की बात अफ्रीका वाले जानें, अपने देश के 50 घरों वाले छोटे-से गांव को बिजली तो हर हाल में उपलब्ध होनी ही चाहिए. इसी बात के लिए जागरुक करना ही इस ब्लॉग का प्रमुख उद्देश्य है, ताकि गोसाइनपुरवा नाम के इस गांव में भी शहनाइयां गूंज सकें.

चलते-चलते हम आपको यह बताते चलें, कि इंग्लैंड की रहने वाली 7 साल की छोटी-सी क्लोइ ने गूगल के बॉस सुंदर पिचाई को लेटर लिख बताया है, कि वह क्यों गूगल में काम करना चाहती हैं. हाथ से लिखे लेटर में क्लोइ ने बताया कि उन्हें कंप्यूटर चलाना आता है और वह ऐसी जगह पर काम करना चाहती है, जहां बैठने के लिए बीन बैग्स होते हैं और गो-कार्ट (इलेक्ट्रिक गाड़ी) भी. क्यूट बात यह है कि सुंदर पिचाई ने क्लोइ को जवाब भी भेजा. सुंदर का सुंदर जवाब था-

‘अच्छी बात है कि तुम्हें कंप्यूटर्स और रोबॉट पसंद हैं. उम्मीद है तुम टेक्नॉलजी के बारे में पढ़ती रहोगी. मुझे लगता है कि अगर तुम मेहनत करती रहोगी, तो तुम गूगल में काम भी कर पाओगी और ओलिंपिक में तैरीकी भी. स्कूल खत्म करने के बाद मुझे तुम्हारी जॉब ऐप्लिकेशन का इंतजार रहेगा’

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।