चिड़िया

पहले मैंने अपने को ही दीन हींन था जाना,
इकदिन मैंने भोर मे देखा चिड़ा चिड़ी को जगाना।
चीं चीं चूँ चूँ की आवाज चिड़ा चिड़ी को सुनाना,
अंगड़ाई लेकर घरसे झाँका चिड़ी,चिड़ा पहचाना।
फिर मैं जा बन मे चिड़ियों का घर देखा वीराना,
कमजोर नही हूँ चिड़ियों से तब मैंने अनुमाना।
और तभी उन चिड़ियों से अपने को बेहतर माना,
कितनी मेहनत करती चिड़िया क्या हालकिसी ने जाना।
तिनका तिनका मुखसे ला ला फिरअपना महल बनाना,
तिनको की ही दीवारे छत,आसमान सामियाना।
जाड़ा गर्मी बरखा मे भी कभी नही दुःखमाना,
दिन को चुन दन बच्चों को दे दन चुनती दाना।
पड़ा परिश्रम करती चिड़िया कभी नही श्रम माना,
पंखों से ढ़क अपने बच्चों को सुख की नींद सुलाना।
सुबह शाम रोते बच्चों को चीं चूँ का गीत सुनाना,
पाठ पढ़ाती बच्चों को घर छोड़ कभी मत जाना।
अच्छे बच्चे कभी न जाते कर मेहनत खाते खाना,
आसमान है अनन्त मुश्किल है थाह लगाना।
पहले अभ्यास करो घरों मे फिर ऊपर उड़ जाना,
मजबूत न हों पर तेरे जबतक मत बाहर आनाजाना।

7

परिचय - डा.जय प्रकाश शुक्ल सेमरहा सम्पर्क :-9532556799

अध्यक्ष:-हवज्ञाम जनकल्याण संस्थान उत्तरप्रदेश भारत *रोजगार सृजन प्रशिक्षण* बेरोजगारी उन्मूलन सदस्यता अभियान सेमरहा,पोस्ट उधौली बाराबंकी उप्र पिन 225412 mob.no.9984540372