देश गाँधी जी का है

यह ठीक है की इस देश का अतीत बड़ा गौरवशाली रहा है इसकी सीमाए असीम रही है इसका भोग करने के लिये देव दनुज दैत्य मनव मे कई बार संग्राम हुआ है लेकिन अब ए बाते बहुत पुरानी हो चुकी है और आज के कुतर्कवादियो मे इसका कोई मोल नही रह गया है / अब तो कुछ लोगो के लिये देश बस उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसे इस देश से लाभ मिल रहा है / लोभ मूल हो गया है और देश गौड हो गया है / बीते समय के साथ देश रियासतो मे बॅंट गया और अपने अपने पराक्रम के अनुसार कुछ लोग रियासतदार बन बैठे या राजा बन बैठे जिनका ध्यान शासन चलाने मे कम अपने पड़ोसियो से कटुता रखने मे ज्यादे रहा था / इसका फायदा उठकर विदेशी आक्रांता आये और अपने रीति रिवाज के अनुसार देश पर शासन किये / भारतीय संस्कृति सभ्यता संस्कार को कोई तवज्जो नही दिये /मुग़ल आये अपने शरीयत अपने मजहब के अनुसार देश पर शासन किये / अंग्रेज़ आये , पूरे देश को ईसाईयत के रंग मे रंग देने का प्रयास किये / यह तो भला हो तत्कालीन साक्षर निरक्षर बुद्धिजीवीयो और इतिहासकारो का जो आने वाली पीढी को अपनी माटी और अपने संसकार को उनमे संजोते रहे / अब तो वह बात भी नही है / सारे कवि साहित्यिक रचना छोड़कर ब्यंगकार हो चुके है , शब्दो की जुगलबंदी से आनेवाली पीढी को एक अच्छा ज्ञान देने के बजाय मनोरंजन करने मे लिप्त हो गये है / पंत निराला भारतेन्दु के ए बांशज भविष्य को क्या देना चाहते है समझ से परे है /

यू ट्यूब पर अक्सर कवि सांमेलन देखता हु , एक दिन एक कवि तुकबंदीकर कह रहे थे की मेरा भी सीना 56 इंच का होता अगर मई भी अपनी बीबी को शादी करके छोड़ दिया होता / एक मूर्धन्य कवि जो इस समय विश्व पटल पर छाये हुए है , जोगिना तररर सुना कर वाहवाही लूट रहे थे / इनकी रचनाये किस क्लास के पाठ्यक्रम मे शामिल होगी अनुसंधान का विषय है / फिर भी कुछ रचना कार है जो साहित्य को मजाक बनने से रोकने के लिये प्रयासरत है / डा विष्णु सक्सेना का कथन की कविता मनोरंजन का साधन नही होना चाहिये संतोष प्रदान करता है / मेरे लिखने का मतलब जहा इतनी बिधवंसक शक्तिया एक साथ काम कर रही है वहा अगर अभी भी हमारी सांस्कृतिक विरासत पूर्णतया पथभ्रष्ट नही हो पाई है तो यह हमारे यहा के जनमानस के विवेक के गंभीरता को प्रदर्शित करता है /

अंत मे इतना ही की हम कितना ही प्रगतिशील हो जाय , कितना ही तार्किक हो जाय लेकिन हमे कुछ परम्पराओ का पालन करना चाहिये , कम से कम जनता भले न करे लेकिन राजनेताओ को करना चाहिये जैसा की मुग़लो अंग्रेजो या विदेशी आक्रान्ताओ ने जिस प्रकार मनमानी शासन किये उसी प्रकार कांग्रेसियो को भी करने देना चाहिये / आखिर आजादी तो गाँधी जी ही दिलवाये है , जैसी की आम धारणा है / या तो इस धारणा को देश अस्वीकार करे या शासन कांग्रेसियो के संविधान कानून या उनके मर्जी के अनुसार चले / मोदी का गाँधी के चस्मे , चर्खा या उनके स्वच्छता अभियां पर कोई अधिकार नही है / इसका इस्तेमाल सिर्फ कांग्रेसी कर सकते है / मोदी इन सब प्रतिको का कैसे इस्तेमाल कर सकते है , मोदी सिर्फ चुनाव जीते है !देश को आजादी थोड़े दिलवाये है !

— राजेंद्र प्रसाद पांडे 

परिचय - राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय

रिटायर्ड उत्तर प्रदेश परिवहन निगम वाराणसी
शिक्षा इंटरमीडिएट यू पी बोर्ड
मोबाइल न. 9936759104