Monthly Archives: February 2017

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    मापनी – 122 122 122 122   शिवा शिव हरी हर हलाहल विषामृत कंठनील शंकर त्रिशूल चंदा धर चित्त नमः शिव शिवाय नमः नमामि नमः अवघड़ी मढ़ी महिमा करुणा नमो वृत॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

  • अंकल …चंदा दो

    अंकल …चंदा दो

      मैं सोकर ही उठा था कि दस-बारह लड़कों ने मेरा घर घेर लिया। मैंने सवालिया निगाहों से उनकी ओर देखा, तो उनका गुंडा नुमा नेता अपने झुंड से बाहर आया। उसने साफ सुथरे फर्श पर...

  • उसकी कहानी भाग –  ५

    उसकी कहानी भाग – ५

    अबकी बार वो आया मेरा बड़ा भाई  बनकर । मुझे याद आया कि मैं अपने बड़े भाई साहब जो की एक हृदय रोग विशेषज्ञ हैं को अपनी हालात बताना ही भूल गया । मैने उन्हें फ़ोन...

  • चिड़िया

    चिड़िया

    पहले मैंने अपने को ही दीन हींन था जाना, इकदिन मैंने भोर मे देखा चिड़ा चिड़ी को जगाना। चीं चीं चूँ चूँ की आवाज चिड़ा चिड़ी को सुनाना, अंगड़ाई लेकर घरसे झाँका चिड़ी,चिड़ा पहचाना। फिर मैं...

  • गज़ल

    गज़ल

    सारे चेहरे हैं अनजाने किसको दूँ आवाज़ यहां, हो गए अपने भी बेगाने किसको दूँ आवाज़ यहां, महफिल खत्म हुई अपने-अपने रस्ते सब यार गए, मुझको डसते हैं वीराने किसको दूँ आवाज़ यहां, पीने लगे लहू...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कभी शब तो कभी सहर नहीं होती । ज़िन्दगी तन्हा बसर नही होती ।। मान लो बात,  लौट आओ तुम । अब तुम बिन गुजर नही होती ।। तुम होते हो तो खुशियां होती है ।...



  • विनती

    विनती

    हे प्रभु विनती हमारी प्रेम से सुन लीजिए दीजिए सद्बुद्धि हमको नाम की धुन दीजिए-   1.हम जहां में ज्ञान की किरणों को बिखराएं सदा दीनजन के दुःख हटा सुख-सुमन छितराएं सदा कामनाएं रखें कम ऐसा...