कविता

“पेड़ लगाओ-धरा बचाओ”

जब गर्मी का मौसम आता, सूरज तन-मन को झुलसाता। तन से टप-टप बहे पसीना, जीना दूभर होता जाता। ऐसे मौसम में पेड़ों पर, फल छा जाते हैं रंग-रंगीले। उमस मिटाते हैं तन-मन की, खाने में हैं बहुत रसीले। ककड़ी-खीरा और खरबूजा, प्यास बुझाता है तरबूजा। जामुन पाचन करने वाली, लीची मीठे रस का कूजा। आड़ू […]

कविता

“कुंडलिया”

कलशा पूजन मातु का, सस्थापन प्रथमेय कंकू चंदन अरु जयी, नवल शृंगार धरेय नवल शृंगार धरेय, मातु चरन नित्य वंदन नवनव दिन नवरात्र, नाचते माँ के नंदन गौतम गण अनुराग, विनय अनुनय भर मनसा श्रद्धा शुद्ध पराग, अलंकृत घर घर कलशा॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

लघुकथा

सबक

रश्मि और सुधीर अपने दस वर्षीय पुत्र दक्ष के साथ तैयार होकर घर के मुख्य दरवाजे पर पहुंचे । बरामदे में बैठी सुधा को देखकर रश्मि उससे मुखातिब हुयी ” माँ जी ! हम लोगों को आने में शायद देर हो जाये । आप अपने लिए कुछ बना कर खा लीजियेगा । ” सुधा ने […]

कविता

माँ

माँ, तू नहीं इस दुनियां में पर, तेरी यादें सदा मेरे साथ है तू, सिर्फ दिखती नहीं लेकिन मैं ये बात जानती हूँ माँ मरकर भी, अपने बच्चे से कभी जुदा होती नहीं तू है! यहीं कहीं मेरे आसपास ही एक अदृश्य शक्ति के रूप में मुझे होता है तेरा पल-पल आभास जब टूटने लगती […]

राजनीति लेख

योगी राज में जनता की उम्मीदें

भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रांड नेता व प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महन्त योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर अपना कार्यभार संभाल लिया है । हाल ही संपन्न में हुए विधानसभा चुनावों में मिली विराट बहुमत के बाद पिछले 18 मार्च को विधायक दल की बैठक में […]

कविता

नकली चेहरा खामोश ज़ुबान

  यह चेहरा और यह जुबान क्यों इतने मज़बूर क्यों सच्चाई से दूर बनावटी मुस्कराहट , जुबान खामोश रहने को मज़बूर , क्यों इतने बनावटी, इतने लाचार, दिल और दिमाग की बात यह चेहरा और यह जुबान दोना नकारने के लिए तैयार ,. दिल सही महसूस करता है दिमाग सही सोचता है. पर इन दोनों […]

राजनीति

विवादित मुद्दे पर हठ का त्याग जरूरी

देश के सर्वोच्च न्यायलय ने विवादित राम मंदिर को लेकर जो सुझाव दिये हैं उसकी कोशिश पहले ही नाकाम रही है । और यही कारण है कि आज यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है । अगर बातचीत से ही इस मसले को सुलझाया जा सकता तो आज यह मामला कोर्ट तक पहुंचता ही नहीं […]

भाषा-साहित्य लेख

मीडिया के बदलते स्वरूप का असर

भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मानी जाती है । लोकतंत्र के एक ऐसे स्तंभ रूप में जिसके बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना ही नहीं की जा सकती । मीडिया को ये सम्मान यूंही नहीं मिला,बल्कि उसे इस सम्मान का हकदार बनाया है […]

सामाजिक

काल और मैं.. एक विचित्र परिस्थिति

काल के विरुद्ध मैं हूँ मेरे विरुद्ध काल है हम दोनो को ही चलना है पर वो मेरे पीछे चल रहा है और मैं उसके आगे पर एक दिन वो मुझसे आगे होगा और मैं रुक जाऊंगा कुछ देर के लिये शांत हो जाऊंगा पर वो तो रुक भी नहीं सकता झुक भी नहीं सकता पर मैं […]

भजन/भावगीत

मैय्या-भजन

मैय्या के द्वारे की मैं बनूंगी जोगनिया अलख जगाऊंगी मैं सारी-सारी रतियां बनूंगी जोगनिया- मैय्या के द्वारे की मैं बनूंगी जोगनिया   1.लाल चुनरिया लाऊंगी मैं मैय्या को ओढ़ाऊंगी हीरों वाला चूड़ा लाल मैं मैय्या को पहनाऊंगी मैय्या के माथे होगी ((होSSSS) मैय्या के माथे होगी लाल-लाल बिंदिया बनूंगी जोगनिया- मैय्या के द्वारे की मैं […]