काव्यमय कथा-7 : मेहनत से ही सफलता मिलती है

कौआ एक बड़ा प्यासा था,
उड़कर पहुंचा एक बाग में,
जहां पड़ा था एक घड़ा पर,
पानी था थोड़ा-सा उसमें.

खूब निराश हुआ पर फिर भी,
हिम्मत को न जवाब दिया,
आसपास पड़े थे कंकड़,
एक उठाकर डाल दिया.

जैसे-जैसे कंकड़ डाले,
पानी ऊपर को था आया,
पानी ऊपर आते देखकर,
कौआ मन-ही-मन हर्षाया.

आखिर पानी ऊपर आया,
पानी पीकर प्यास बुझाई,
मेहनत से मिलती है सफलता,
सबको ही यह राह सुझाई.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।