राजनीति

बहुबात ही बहुबात

वैसे तो यहाँ सरसरी तौर पर भय भूख भ्रष्टाचार बेरोजगारी बेईमानी लूट -खसोट का संकट है लेकिन बहुबात का संकट उससे भी बड़ा है और यह संकट तब से और बढ़ गया है जबसे भारत के राजनैतिक क्षितिज पर नरेन्द्र मोदी जी का उदय हुआ है / क्योकि मोदी जी के साफ़ सपाट कार्य करने की शैली बिरोधी से लेकर प्रबुद्ध तथा नामचीनों को रास नहीं आ रही है / सब बहुबात पर उत्तर आये है , क्या बोल रहे है इससे मतलब नहीं है , मतलब है मोदी के प्रति कितना लोगो में भ्रम फैलाया जाय , कितना नफरत भर दिया जाय / सफल नहीं हो रहे है यह अलग बात है / फिर भी कुछ प्रदेश के लोग इनके झांसे में आ ही गए थे और जिसका सामान्य ज्ञान चपरासी बनने योग्य भी नहीं था मुख्यमंत्री तक बना दिए / अप्रत्याशित रूप से संसद से लेकर विधान सभा बहुबातीयो से भर गया / मायावती , लालू , केजरीवाल तो सत्ता का स्वाद पा गए लेकिन राहुल की टिक्की अभी तक बैठ नहीं पायी है यद्यपि राहुल अपने पुरे बाराती के साथ इस ट्रिक को बड़े शिद्दत से आजमा रहे है / जिस सदन में कभी लोहिया , बाजपेई की धीर गंभीर बाणी सुनाई पड़ती थी जिससे सरकार सकते में आ जाती थी अब वहा बिगत तीन साल से अडानी – अम्बानी , शूट -बूट सुनाई पड़ रहा है / और कांग्रेस की मंशा है की यही टेप रिकार्ड देश का अगला प्र म हो ! यह तो भला हो देश के ब्यवहारिक ज्ञान परिपूर्ण जान मानस का जो डिग्रीधारियों से कई गुना बुद्धिमान है , कांग्रेसियो और बुद्धिजीवियों का एक नहीं चलने दे रहा है /
निश्चित तौर पर विकाश देश की सबसे बड़ी जरुरत है लेकिन कांग्रेस के कुप्रयासों से देश में जो मानसिक विकृति आ गयी है उससे देश को बाहर निकाना मोदी सरकार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है / सभी आत्मश्लाघा त्याग कर प्र म जी को इसके लिए कठोर से कठोर कदम उठाना चाहिए और जो , जो भाषा समझे उसे उसी भाषा में जवाब देना चाहिए / लोकप्रियता और अलोकप्रियता इतिहास का विषय है / गाली का जवाब कभी भी प्रार्थना नहीं होता /५६ इंच के सीने में बहुत जगह है , जैसे सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी प्र म जी अपने सीने में टांक लिए उसी प्रकार कुछ और तथाकथित बुराइया प्र म को अपने सीने में टांक लेना चाहिए /

राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय

रिटायर्ड उत्तर प्रदेश परिवहन निगम वाराणसी शिक्षा इंटरमीडिएट यू पी बोर्ड मोबाइल न. 9936759104