गीत/नवगीत

गीत – जनता ने ऐलान सुनाया

(यू पी में बीजेपी की प्रचंड विजय पर तात्कालिक प्रतिक्रिया व्यक्त करती कविता)

जनता ने एलान सुनाया यूपी के दरबारों को
नही चुनेंगे, लोकतंन्त्र के हैवानों हत्यारों को

नहीं चुनेंगे, जाति वर्ग का जाल बिछाने वालों को
नही चुनेंगे, अपना ही परिवार बढ़ाने वालों को

नही चुनेंगे, मज़हब वाला ज़हर बांटने वालों को
नही चुनेंगे, गौ माता के शीश काटने वालों को

नहीं चुनेंगे, कैराना पर मौन धारने वालों को
नहीं चुनेंगे, संतों को बेख़ौफ़ मारने वालों को

नही चुनेंगे, नौकरियों में फर्जी भर्ती वालों को
नहीं चुनेंगे, लालच वाली गठबंधन की चालों को

नही चुनेंगे, चोरों से समझौता करने वालों को
दीवाली पर अफ्तारों का न्योता करने वालों को

नही चुनेंगे, दहशतगर्दों के पापी हमदर्दों को
नहीं चुनेंगे, सिंह रूप में छुपे हुए नामर्दों को

यू पी ना बंगाल बनेगा, आस जगा दी जनता में
छप्पन इंची सीने पर ही, मुहर लगा दी जनता ने

उनके चेहरे देखो तो जो अपना झंडा ताने थे
तीनों के तीनों मुस्लिम वोटों के ही दीवाने थे

सोते जगते मुस्लिम मुस्लिम जो चिल्लाने वाले थे
राम धनुष को छोड़, गजनबी की तलवार संभाले थे

12 बजते ही दिन में भी रात दिखा दी यू पी ने
पप्पू टीपू को उनकी औकात दिखा दी यू पी ने

जो परिवार सिर्फ सैफई के इर्द गिर्द ही नाचा है
ये चुनाव, उनके गालों पर कसके एक तमाचा है

कार्ड दलित मुस्लिम वाले की जुगत नहीं लग सकती है
माया ठगिनी अब जनता को और नहीं ठग सकती है

लड़को ने गलती कर डाली, जनता ने इन्साफ किया
अवध, बिरज, बुन्देल खंड में आज सूपड़ा साफ किया

मिला आज बहुमत प्रचंड तो साफ नज़र में आया है
गुंडों की छाती पर अबकी केसरिया लहराया है

जिनको तीन तलाक था प्यारा, उनका सपना तोड़ दिया
जनता ने उनको ही तीन तलाक बोलकर छोड़ दिया

लगता है इस मुद्दे ने वोटिंग में रंग जमाया है
सलमा, जीनत ने भी शायद कमल का बटन दबाया है

अब चलने दो लहर क्रांति की, परिवर्तन को आने दो
यू पी में सबके विकास की गंगा को बह जाने दो

जनता उन्नति खोज रही है, मोदी के जयकारे में
सारी यू पी झूम रही है जय श्री राम के नारे में

— कवि गौरव चौहान