कविता

कविता : माँ को पयाम

मैं ख्याल की धरती पर माँ को पयाम लिखती हूँ
अता की जो तुमने ये दुनिया मुझे
सिर को झुकाकर तेरा आवाहन करती हूँ

कहते हैं माँ हो तो कद्र होती है ,
तुम होती तो मेरी भी कद्र होती
मेरे लिए भी कोई आँख तो रोती
अब तो अपने ही आंसू से, तेरे नाम को लिखती हूँ
मैं ख्याल की धरती पर, माँ को पयाम लिखती हूँ

तेरे साये में मुझे इल्म न था जहां का
जीवन तो बस बसंत था, असर ये तेरी दुआ का
अब तो इस खाली दर्पण में तेरे अक्स को भरती हूँ
मैं ख्याल की धरती पर माँ को पयाम लिखती हूँ

— चन्द्रकांता सिवाल ‘चन्द्रेश’

चन्द्रकान्ता सिवाल 'चंद्रेश'

जन्म तिथि : 15 जून 1970 नई दिल्ली शिक्षा : जीवन की कविता ही शिक्षा हैं कार्यक्षेत्र : ग्रहणी प्ररेणास्रोत : मेरी माँ स्व. गौरा देवी सिवाल साहित्यिक यात्रा : विभिन्न स्थानीय एवम् राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित कुछ प्रकाशित कवितायें * माँ फुलों में * मैली उजली धुप * मैट्रो की सीढ़ियां * गागर में सागर * जेठ की दोपहरी प्रकाशन : सांझासंग्रह *सहोदरी सोपान * भाग -1 भाषा सहोदरी हिंदी सांझासंग्रह *कविता अनवरत * भाग -3 अयन प्रकाशन सम्प्राप्ति : भाषा सहोदरी हिंदी * सहोदरी साहित्य सम्मान से सम्मानित