Monthly Archives: March 2017

  • किस्सा-ए-कुर्ता पाजामा

    किस्सा-ए-कुर्ता पाजामा

    चुनाव का माहौल है। प्रजातंत्र में चुनाव की हर बात हास्य उत्पन्न करती है। नेताओं के बोल, रंग ढंग, चुनाव रणनीति में स्वयं ही हास्य होता है और दूसरा व्यंग्य।   वोट दो, वोट दो, नेता...

  • और अब गधा !

    और अब गधा !

    अंग्रेज इस देश को सांपो बिच्छुओं और जादूगरों का देश कहते थे, यहाँ के रीती रिवाजो परम्पराओ का मजाक उड़ाया करते थे, कुत्ते तक कह देते थे लेकिन गधा कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे...

  • आजादी                  भाग –३६

    आजादी भाग –३६

    टेम्पो के करीब पहुंचा रामसहाय  उस के करीब किसी को न पाकर टेम्पो के पीछे की तरफ एक डंडा फटकारते हुए ऊँची आवाज में चिल्लाया ” अरे कौन है भाई इस गाड़ी का ड्राईवर ? जल्दी...

  • प्रेम : एक अनकहा अहसास

    प्रेम : एक अनकहा अहसास

    भरी दोपहरी में टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों पर वह चला जा रहा था…सूर्य की तीखी किरणें उसके शरीर को बेधती जा रही थी…उसका विश्रांत-क्लांत मन छाया की तलाश करने लगा…जहाँ..वह दो पल ठहर विश्राम कर ले…और…फिर अपने गंतव्य...


  • संकटमोचन

    संकटमोचन

    कार्तिक नवमी कृष्णपक्ष सोम से प्रारम्भ मान। चतुर्दिनोट्सव शहस्र द्वै पंचाशत सम्बत जान।। सम्बत अहै प्रमाण थापना महाबली की। जात्बरात सेमरहस उत्तर दिसि कल्याणी।। जय जय जय बजरंगवीर,तेरी गूँजत जय जयकार चली जलमे तुमको धूढ़न कारन,भक्त...

  • गज़ल

    गज़ल

    रास्ते की जो मुझे दीवार समझता रहा, उसी शख्स को मैं अपना यार समझता रहा, लोग झूठ-मूठ का सलाम ठोकते रहे, मैं यूँ ही अपने आप को सरकार समझता रहा, सबने इस्तेमाल किया मुझे अपने मतलब...