कविता

तेरी बेरुखी

_________ “”तू अपने ग़म से आज़िज है मैं तेरे ग़म से अफ़शुर्दा तू है मशग़ूल औरों में मैं तुझ बिन अश्क़ में गुम हूँ… तेरा जो सर्द लहज़ा है ये मेरी जान ले लेगा तेरे इक अत्फ़ की ख़ातिर आतिशे हुज़्न में गुम हूँ···· क्या है अस्बाब तेरी बेरूखी का किसको मालूम है हमें तो […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

मुहब्बत में गले मिलती गमों से धड़कती आज सबकी धड़कनों से जहाँ सारे हुआ है नाम रोशन बहे आँसू बहुत पर लोचनों से रिझाया दर्शकों को फिल्म से जब दिखे तू चाँदनी सी महफिलों से नशे में डूब अपने को भुलाया कभी फिर से न उड पाई परों से हमेशा याद में बसती सभी के […]

कविता

वृद्धावस्था :एक अन्तहीन सूनापन

दूर तलक अकेलापन अन्तःतल तक ध्वनि रहित रिक्तता स्नेह -लगाव का अभाव प्रेम की लालसा बेबस और लाचार पथराई आँखों से खोज केवल मात्र सहारे की जिसे बना अबलम्ब जीवन नैया के भवसागर से तर सके आत्म-चीत्कार , आत्म-वेदना हार मानने लगती तब, बुढ़ापा भार बोझिल बन अन्तहीन गहराई की ओर धकेल गर्त में ले […]

कहानी

ह ला ला या हलाल ? ( एक कहानी )

 शबाना का शौहर अब्बास जब से बेरोजगार हुआ था मोहल्ले के लम्पट बदमाशों से उसकी दोस्ती गहरी हो गयी थी । उन्हीं में से एक कादिर उसका लंगोटिया यार बन गया था । पढ़ी लिखी शबाना एक फर्म में सहायक मैनेजर के पद पर कार्यरत थी । गृहस्थी की गाड़ी किसी तरह चल रही थी […]

लघुकथा

#लघुकथा_प्रवृत्ति

#लघुकथा_प्रवृत्ति आज पाचवीं बार विद्यालय की गिरी हुई कोट (खेल मैदान की दीवार) को दीर्धविश्रांति में वह ठीक कर रहा था. तभी साथी शिक्षक सुदेश ने पास आ कर कहा,” सर जी ! यह सब महेश का कियाधरा है. वह स्कूल के छात्रों को आप के खिलाफ उकसा कर पत्थर की कोट गिरवा देता है. […]

कहानी

गलती किसकी ?

जून की चिलचिलाती धूप में सुधा अभी घर के बाहर पहुँची ही थी कि उसे घर के अंदर से कुछ आवाजें सुनाई दीं । उसकी जेठानी और पड़ौसन बैठी उसी की बातें कर रही थीं । उसकी जेठानी कह रही थी – “अरे बहन क्या बताऊँ, नई देवरानी तो कुछ काम ही नहीं करती है […]

लघुकथा

दिन : लौट के आते हैं

आज सतीश ने जीवन में पहली बार शराब पी थी और बूढ़ा सतीश शराब के नशे में पलंग पर लेटे-लेटे याद कर रहा था अपने बचपन को , अपने जीवन को । धीरे – धीरे उसकी आँखें नम होती गईं और कुछ देर बाद उसकी आँखों से एक सुरा धारा निकल पढ़ी और फिर जैसे […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आदि शंकराचार्य एवं स्वामी दयानन्द

आदि शंकराचार्य एवं स्वामी दयानन्द हमारे देश के इतिहास की दो सबसे महान विभूति है। दोनों ने अपने जीवन को धर्म रक्षा के लिए समर्पित किया था। दोनों का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और दोनों ने जातिवाद के विरुद्ध कार्य किया। दोनों के बचपन का नाम शंकर और मूलशंकर था। दोनों को […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

थोक में गर नहीं तो फुटकर दे चंद खुशियाँ मेरे मुक़द्दर दे जिस्म से अब थकान बोलती है आज खारों का सही बिस्तर दे जब नज़र में हो सिर्फ़ उर्यानी रूह के पैरहन को अस्तर दे मैंने शाख़ों पे उड़ लिया काफ़ी अब उड़ानों को मेरी अंबर दे यूँ न मुझको हथेलियों में समेट दे […]

कविता

कविता : पूछो

चाँद क्या है रात से पूछो जमीं क्या है आसमान से पूछो दर्द क्या है इश्क के अरमान से पूछो हार गया जो मै इश्क के आराम से पूछो हार  गए इश्क  मे भी हम समाज से पूछो जी रहे है क्यो हम हमारे कलाम से पूछो