Monthly Archives: April 2017

  • तेरी बेरुखी

    तेरी बेरुखी

    _________ “”तू अपने ग़म से आज़िज है मैं तेरे ग़म से अफ़शुर्दा तू है मशग़ूल औरों में मैं तुझ बिन अश्क़ में गुम हूँ… तेरा जो सर्द लहज़ा है ये मेरी जान ले लेगा तेरे इक...

  • गजल

    मुहब्बत में गले मिलती गमों से धड़कती आज सबकी धड़कनों से जहाँ सारे हुआ है नाम रोशन बहे आँसू बहुत पर लोचनों से रिझाया दर्शकों को फिल्म से जब दिखे तू चाँदनी सी महफिलों से नशे...




  • गलती किसकी ?

    गलती किसकी ?

    जून की चिलचिलाती धूप में सुधा अभी घर के बाहर पहुँची ही थी कि उसे घर के अंदर से कुछ आवाजें सुनाई दीं । उसकी जेठानी और पड़ौसन बैठी उसी की बातें कर रही थीं ।...



  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    थोक में गर नहीं तो फुटकर दे चंद खुशियाँ मेरे मुक़द्दर दे जिस्म से अब थकान बोलती है आज खारों का सही बिस्तर दे जब नज़र में हो सिर्फ़ उर्यानी रूह के पैरहन को अस्तर दे...

  • कविता : पूछो

    कविता : पूछो

    चाँद क्या है रात से पूछो जमीं क्या है आसमान से पूछो दर्द क्या है इश्क के अरमान से पूछो हार गया जो मै इश्क के आराम से पूछो हार  गए इश्क  मे भी हम समाज...