पद्य साहित्यमुक्तक/दोहा

दोहे

दोहे
अपनी ही आलोचना, है मुक्ति प्राप्ति मार्ग
गलती देखे और का, उनमे अभाव त्याग |
अगर क्षमा ही श्रेष्ठ है, जिद्दी क्यों है संत
सभी लड़ाई व्यर्थ है, सबका सामान अंत |
मुस्लिम हो या हिन्दू हो, किसी की नहीं भूमि
देव अवतरण भूमि है, बनाओ न बध-भूमि |
सूद सहित है भोगना, है जो तेरा कर्म
जाँचा परखा जायगा, समझ ले कर्म –मर्म|
वाइज़ हो या साधु हो, रखे सभी यह याद
झगडा लाता नाश है, कौम होत बर्बाद |
कालीपद ‘प्रसाद’

*कालीपद प्रसाद

जन्म ८ जुलाई १९४७ ,स्थान खुलना शिक्षा:– स्कूल :शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ,धर्मजयगड ,जिला रायगढ़, (छ .गढ़) l कालेज :(स्नातक ) –क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भोपाल ,( म,प्र.) एम .एस .सी (गणित )– जबलपुर विश्वविद्यालय,( म,प्र.) एम ए (अर्थ शास्त्र ) – गडवाल विश्वविद्यालय .श्रीनगर (उ.खण्ड) कार्यक्षेत्र - राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कालेज ( आर .आई .एम ,सी ) देहरादून में अध्यापन | तत पश्चात केन्द्रीय विद्यालय संगठन में प्राचार्य के रूप में 18 वर्ष तक सेवारत रहा | प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुआ | रचनात्मक कार्य : शैक्षणिक लेख केंद्रीय विद्यालय संगठन के पत्रिका में प्रकाशित हुए | २. “ Value Based Education” नाम से पुस्तक २००० में प्रकाशित हुई | कविता संग्रह का प्रथम संस्करण “काव्य सौरभ“ दिसम्बर २०१४ में प्रकाशित हुआ l "अँधेरे से उजाले की ओर " २०१६ प्रकाशित हुआ है | एक और कविता संग्रह ,एक उपन्यास प्रकाशन के लिए तैयार है !